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सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या मामले में पटना हाईकोर्ट की जमानत रद्द की, समाज पर बड़ा कलंक

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सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि दहेज हत्या समाज के लिए कलंक और महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

supreme-court-dowry-murder-bail-cancel-patna-highcourt दिल्ली। दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है और इसे समाज पर एक कलंक बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी रोक के बावजूद यह कुप्रथा हजारों महिलाओं की अप्राकृतिक मौत का कारण बन रही है।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और विजय बिश्नोई की पीठ ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपित की जमानत रद्द कर दी। पीठ ने यह भी कहा कि पटना हाई कोर्ट द्वारा आरोपित को जमानत पर रिहा करने का आदेश पूरी तरह गलत था।

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पीठ ने कहा कि दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में हाई कोर्ट को विवेक प्रयोग करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। दहेज हत्या मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। इसके बावजूद कई मामलों में दूल्हे के परिवार द्वारा दुल्हन को मार दिया जाता है या आत्महत्या के लिए मजबूर किया जाता है।

अभियुक्त के वकील ने कहा कि यह आत्महत्या का मामला है और मृतका की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए बताया कि मृतका की शादी आरोपित से डेढ़ साल पहले हुई थी। महिला एक सितंबर, 2024 को अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर बाहरी और आंतरिक चोटों के निशान पाए गए और मृत्यु का कारण सिर में चोट के कारण रक्तस्राव बताया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने केवल आरोपित की न्यायिक हिरासत और दो गवाहों की पूछताछ पर ध्यान दिया, जबकि मृतका के शरीर पर चोटों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण बातों की अनदेखी की।

पीठ ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत रद्द कर दी और आदेश दिया कि आरोपी को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।

यूपी गैंग्स्टर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंग्स्टर एवं समाज विरोधी गतिविधियां अधिनियम, 1986 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी लंबित याचिकाओं को संलग्न करने का आदेश दिया। इन याचिकाओं की सुनवाई तीन जजों की पीठ के समक्ष होगी।

यह कानून उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध, डकैती और समाज विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम कानून की प्रभावशीलता और नागरिक सुरक्षा पर गहन चर्चा को सुनिश्चित करता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज हत्या और संगठित अपराध दोनों ही मामलों में न्यायपालिका को संवेदनशील और सतर्क रहना होगा। यह समाज में व्याप्त गंभीर बुराइयों के खिलाफ एक सख्त संदेश भी है।

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