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पटना में गैस सिलेंडर पर बवाल: फुलवारी शरीफ में लोगों ने किया हंगामा, एनएच जाम
- Reporter 12
- 31 Mar, 2026
पटना के फुलवारी शरीफ में गैस सिलेंडर की देरी से नाराज लोगों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। नवादा मोड़ के पास लोगों ने एनएच-98/139 जाम कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
पटना/फुलवारी शरीफ: राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर लोगों का गुस्सा सोमवार को सड़क पर फूट पड़ा। सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा किया और नेशनल हाईवे-98/139 को जाम कर दिया।
इस विरोध के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सरकार और गैस आपूर्ति व्यवस्था को लेकर लोगों में पहले से नाराजगी थी, लेकिन इस बार इंतजार और अव्यवस्था ने मामला सड़क तक पहुंचा दिया।
नवादा मोड़ के पास सड़क पर बैठ गए लोग
यह पूरा मामला एम्स के नजदीक नवादा मोड़ काली मंदिर के आसपास का बताया जा रहा है।
यहां बड़ी संख्या में लोग गैस सिलेंडर की समस्या को लेकर सड़क पर उतर आए और कई उपभोक्ता सिलेंडर लेकर ही सड़क पर बैठ गए।
विरोध इतना तेज था कि कुछ ही देर में इलाके की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
जो लोग काम पर जा रहे थे, अस्पताल की ओर जा रहे थे या दूसरी दिशा में निकलना चाहते थे, उन्हें जाम के कारण काफी देर तक फंसे रहना पड़ा।
सिलेंडर बुक, लेकिन डिलीवरी गायब
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि समस्या सिर्फ एक दिन की नहीं है, बल्कि कई दिनों से गैस सिलेंडर की आपूर्ति समय पर नहीं हो रही है।
लोगों ने आरोप लगाया कि बुकिंग कराने के बाद उनके मोबाइल पर सिलेंडर बुक होने और डिलीवरी से जुड़ा संदेश तो आ जाता है, लेकिन सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता।
कई उपभोक्ताओं का कहना था कि वे सुबह से ही सिलेंडर लेने की उम्मीद में लाइन में लगे रहे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
यही नाराजगी धीरे-धीरे बड़े विरोध में बदल गई।
नंबर आने के बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गैस वितरण में गड़बड़ी अब आम बात बन गई है।
उनका कहना है कि कई बार टोकन या नंबर आने के बावजूद सिलेंडर नहीं दिया जाता, जिससे लोगों को बार-बार एजेंसी और गोदाम के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
रोजमर्रा की जरूरत की चीज होने के कारण गैस सिलेंडर में देरी सीधे परिवारों की रसोई पर असर डाल रही है।
घर में खाना बनाने से लेकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों तक पर इसका असर पड़ रहा है, इसलिए लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
गोदाम पर भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब उन्हें एजेंसी स्तर पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, तो कई लोग सीधे गोदाम तक पहुंच गए।
लेकिन वहां भी उन्हें ऐसा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे यह भरोसा बन सके कि सिलेंडर कब मिलेगा।
यही बात लोगों को और ज्यादा नाराज कर गई।
लोगों का कहना है कि अगर आपूर्ति में दिक्कत है, तो उपभोक्ताओं को साफ-साफ बताया जाना चाहिए, लेकिन बार-बार सिर्फ इंतजार करवाना लोगों के साथ अन्याय है।
सड़क जाम से दोनों तरफ लंबी कतार
जैसे ही लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध शुरू किया, एनएच-98/139 पर यातायात प्रभावित होने लगा।
कुछ ही देर में सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई।
दोपहिया, चारपहिया, ऑटो और बड़े वाहन तक जाम में फंस गए।
आवागमन बाधित होने से रोजमर्रा के यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थानीय स्तर पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था।
पुलिस पहुंची, लेकिन लोग मांग पर अड़े रहे
सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई।
पुलिस ने पहले लोगों को शांत कराने और रास्ता खुलवाने की कोशिश की।
हालांकि शुरुआती दौर में प्रदर्शन कर रहे लोग अपनी मांगों पर डटे रहे और उन्होंने साफ कहा कि जब तक गैस वितरण व्यवस्था में सुधार का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लोगों की नाराजगी सिर्फ उस दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से जमा हो रही परेशानी का नतीजा थी।
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लोगों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?
इस पूरे विरोध में लोगों की सबसे बड़ी शिकायत अव्यवस्थित वितरण प्रणाली को लेकर सामने आई।
लोगों का कहना है कि गैस बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं है।
किस दिन सिलेंडर मिलेगा, किसे पहले मिलेगा, देरी क्यों हो रही है—इन सवालों का जवाब उपभोक्ताओं को समय पर नहीं मिलता।
ऐसी स्थिति में आम लोग खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं और जब परेशानी बढ़ती है, तो मामला विरोध तक पहुंच जाता है।
बार-बार क्यों बन रही ऐसी स्थिति?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह कोई पहली घटना नहीं है।
उनका कहना है कि हर कुछ दिन पर सिलेंडर की किल्लत जैसी स्थिति बन जाती है।
कई बार सप्लाई धीमी पड़ जाती है, तो कई बार वितरण केंद्रों पर भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगती है।
अगर समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
रसोई पर सीधा असर, महिलाओं की बढ़ी परेशानी
गैस सिलेंडर की समस्या का सबसे ज्यादा असर घरों की रसोई पर पड़ रहा है।
घर की महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं, क्योंकि खाना बनाने का पूरा काम इसी पर निर्भर करता है।
अगर समय पर सिलेंडर नहीं मिले, तो परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है, जो हर किसी के लिए आसान नहीं होती।
शहरी इलाकों में जहां ज्यादातर घर पूरी तरह गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं, वहां ऐसी गड़बड़ी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है।
प्रशासन से क्या मांग कर रहे लोग?
प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं की मांग है कि गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाया जाए।
लोग चाहते हैं कि बुकिंग के बाद तय समय पर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित हो और यदि किसी वजह से देरी हो रही है, तो उसकी जानकारी उपभोक्ताओं को समय पर दी जाए।
इसके अलावा एजेंसी और गोदाम स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
लोगों का कहना है कि रोज-रोज की इस परेशानी से उन्हें छुटकारा मिलना चाहिए।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
फुलवारी शरीफ की इस घटना ने गैस आपूर्ति व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर राजधानी क्षेत्र में ही लोग सिलेंडर के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं, तो इससे पूरे सिस्टम की कमजोरी सामने आती है।
यह सिर्फ एक मोहल्ले या एक एजेंसी की समस्या नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन गया है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को सिर्फ जाम खुलवाने तक सीमित रखता है या फिर जमीनी स्तर पर सुधार की दिशा में भी ठोस कदम उठाता है।
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निष्कर्ष
पटना के फुलवारी शरीफ में गैस सिलेंडर को लेकर हुआ यह विरोध सिर्फ एक दिन का हंगामा नहीं, बल्कि लोगों की बढ़ती नाराजगी का बड़ा संकेत है।
जब जरूरी घरेलू जरूरत की चीज समय पर नहीं मिले और जवाबदेही भी साफ न हो, तो जनता का गुस्सा सड़क पर आना तय माना जाता है।
फिलहाल इस घटना ने प्रशासन और गैस आपूर्ति व्यवस्था—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आखिर सिलेंडर की यह किल्लत कब खत्म होगी और आम उपभोक्ताओं को राहत कब मिलेगी।
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