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कोइलवर में बनेगा फोरलेन रेल ब्रिज, एक साथ कई ट्रेनों की आवाजाही होगी आसान

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बिहार के कोइलवर में देश का दूसरा फोरलेन रेल ब्रिज बनाने की तैयारी है। इस परियोजना से हावड़ा-पटना-डीडीयू रेलखंड पर ट्रैफिक दबाव कम होगा और एक साथ कई ट्रेनों की आवाजाही संभव हो सकेगी।

कोइलवर रेल पुल के विस्तार की बड़ी तैयारी

बिहार के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है। कोइलवर में मौजूदा रेल पुल के समानांतर देश का दूसरा फोरलेन रेल ब्रिज बनाने की तैयारी की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पूर्व मध्य रेलवे ने अपना प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है और अब मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

यह पुल बनने के बाद न सिर्फ ट्रेनों की आवाजाही तेज होगी, बल्कि बिहार के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक पर जाम जैसी स्थिति भी काफी हद तक कम हो सकती है।

एक साथ कई ट्रेनों के गुजरने की बनेगी सुविधा

फिलहाल कोइलवर का रेल पुल दो लाइनों पर आधारित है, यानी एक लाइन से अप और दूसरी से डाउन दिशा की ट्रेनें गुजरती हैं। इससे ट्रैफिक दबाव बढ़ने पर कई बार ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है।

लेकिन प्रस्तावित फोरलेन रेल ब्रिज बनने के बाद इस मार्ग पर एक साथ कई ट्रेनों की आवाजाही संभव हो सकेगी। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ट्रेनों के इंतजार, रुकावट और परिचालन दबाव में कमी आने की उम्मीद है।

रेलवे के लिए यह परियोजना सिर्फ एक नया पुल नहीं, बल्कि पूरे रूट की क्षमता बढ़ाने वाला बड़ा बुनियादी ढांचा सुधार मानी जा रही है।

3500 से 4000 करोड़ रुपये तक आ सकती है लागत

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस फोरलेन रेल ब्रिज के निर्माण पर करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है।

चूंकि यह एक बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परियोजना है, इसलिए इसके लिए केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड की मंजूरी जरूरी होगी। फिलहाल रेलवे स्तर पर इसकी योजना रिपोर्ट और तकनीकी तैयारी पर काम चल रहा है।

संभावना जताई जा रही है कि विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे औपचारिक रूप से आगे की स्वीकृति प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।

मौजूदा पुल के समानांतर होगा निर्माण

जानकारी के मुताबिक, नया रेल ब्रिज मौजूदा कोइलवर पुल के समानांतर बनाया जाएगा। इससे निर्माण के दौरान वर्तमान रेल परिचालन पर कम असर पड़ेगा और भविष्य में पुरानी तथा नई संरचना को एक साथ उपयोग में लाया जा सकेगा।

कोइलवर का इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि यह बिहार के रेल और सड़क संपर्क के लिहाज से लंबे समय से एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

क्यों जरूरी है यह नया रेल ब्रिज?

कोइलवर में फोरलेन रेल ब्रिज की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है, क्योंकि हावड़ा-पटना-डीडीयू (पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

यह देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक है, जहां:

लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें

मालगाड़ियां

इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनें

लगातार संचालित होती हैं।

ऐसे में मौजूदा क्षमता कई बार पर्याप्त नहीं रह जाती। नया फोरलेन पुल इस दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

रेलवे तेज रफ्तार और ज्यादा क्षमता पर कर रहा फोकस

रेलवे इन दिनों सिर्फ नई ट्रेनों के संचालन पर ही नहीं, बल्कि रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने और गति सुधारने पर भी तेजी से काम कर रहा है।

हाल के समय में पूर्व मध्य रेलवे ने कुछ प्रमुख मार्गों पर तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए परीक्षण भी किए हैं। रेलवे की कोशिश है कि मुख्य कॉरिडोर पर:

ट्रेनों की औसत गति बढ़े

लाइन क्षमता मजबूत हो

परिचालन बाधाएं कम हों

कोइलवर फोरलेन रेल ब्रिज इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

तीसरी और चौथी रेल लाइन की बड़ी योजना भी जुड़ी

इस पुल परियोजना को रेलवे के बड़े विस्तार प्लान से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, डीडीयू से झाझा के बीच आधुनिक तीसरी और चौथी रेल लाइन विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है।

इस बड़े विस्तार प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 17,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस कॉरिडोर के कई हिस्सों पर काम की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि कुछ हिस्सों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

यानी कोइलवर का नया फोरलेन पुल अकेला प्रोजेक्ट नहीं होगा, बल्कि यह बिहार और पूर्वी भारत के रेल ढांचे को नया आकार देने वाली व्यापक योजना का अहम हिस्सा बन सकता है।

यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?

अगर यह परियोजना मंजूर होकर तय समय पर धरातल पर उतरती है, तो यात्रियों को कई तरह की राहत मिल सकती है:

ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी

रूट पर भीड़भाड़ का दबाव कम

अधिक ट्रेनों के संचालन की संभावना

लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए बेहतर टाइमिंग

मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के बीच बेहतर संतुलन

इससे बिहार से होकर गुजरने वाले प्रमुख रेल रूटों की विश्वसनीयता और क्षमता दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।

बिहार के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?

बिहार लंबे समय से बेहतर रेल संपर्क और आधुनिक बुनियादी ढांचे की मांग करता रहा है। कोइलवर जैसे महत्वपूर्ण बिंदु पर फोरलेन रेल ब्रिज का निर्माण न सिर्फ परिवहन सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, और यात्रा सुगमता पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।

ऐसे प्रोजेक्ट भविष्य में बिहार को पूर्वी भारत के मजबूत रेल नेटवर्क से और अधिक मजबूती से जोड़ने का काम करेंगे।

निष्कर्ष

कोइलवर में प्रस्तावित फोरलेन रेल ब्रिज बिहार के रेल इतिहास में एक बड़ी परियोजना साबित हो सकती है। अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो यह पुल न केवल ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाएगा, बल्कि बिहार के व्यस्त रेल मार्गों को नई क्षमता भी देगा।

फिलहाल सबकी नजर रेलवे बोर्ड की मंजूरी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर टिकी है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार को रेल संपर्क के क्षेत्र में एक बड़ा तोहफा मिल सकता है।

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