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क्राइम ब्रांच बनकर आया ठग, मुंगेर के कारोबारी से 6 लाख के गहने उड़ा ले गया
- Reporter 12
- 06 Apr, 2026
मुंगेर के आजाद चौक के पास खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले एक ठग ने प्रतिष्ठित व्यवसायी नंदकिशोर पाहूजा से करीब 6 लाख रुपये के सोने के गहने ठग लिए। पुलिस सीसीटीवी खंगाल रही है।
मुंगेर/आलम की खबर: बिहार के मुंगेर में दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज ठगी ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की सतर्कता, दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके आजाद चौक के पास एक शातिर ठग ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक प्रतिष्ठित व्यवसायी को इस तरह अपने जाल में फंसाया कि कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये के सोने के गहने गायब हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत और हैरानी दोनों का माहौल है, क्योंकि जिस तरीके से यह वारदात अंजाम दी गई, उसने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब सिर्फ बल या हथियार से नहीं, बल्कि दिमाग और मनोवैज्ञानिक दबाव से भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, इस ठगी का शिकार बने शहर के जाने-माने व्यवसायी नंदकिशोर पाहूजा उर्फ बच्चू बाबू। बताया जा रहा है कि रविवार दोपहर करीब 2:15 बजे वह किसी काम से आजाद चौक के पास स्थित एक प्रतिष्ठान पर पहुंचे थे। वहां से कागजात लेकर जैसे ही वह अपनी मोटरसाइकिल के पास पहुंचे, तभी एक युवक उनके पास आया और बेहद सामान्य अंदाज में कहा कि “साहब बुला रहे हैं।” पहली नजर में यह बात साधारण लगी, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित ठगी में बदल गया।
व्यवसायी जैसे ही आगे बढ़े, वहां मौजूद एक दाढ़ी वाला युवक पुलिसिया रौब में उनसे बात करने लगा। उसने खुद को क्राइम ब्रांच से जुड़ा अधिकारी बताया और बेहद सख्त लहजे में सवाल किया कि शहर में इतनी घटनाएं हो रही हैं, फिर भी वह इतने गहने पहनकर क्यों घूम रहे हैं। आरोपी ने ऐसी भाषा और ऐसा दबदबा दिखाया कि पीड़ित पूरी तरह से सहम गए। आरोप है कि ठग ने उन्हें तुरंत गहने उतारने के लिए कहा और सुरक्षा का हवाला देकर ऐसा माहौल बना दिया, मानो वह कोई आधिकारिक जांच कर रहा हो। इसी मानसिक दबाव में आकर व्यवसायी ने अपनी सोने की मोटी चेन और तीन अंगूठियां उतार दीं।
यहीं से इस ठगी की असली चाल शुरू हुई। आरोपी ने बेहद चालाकी से कहा कि इतनी कीमती चीजों को खुले में रखना ठीक नहीं है, इसलिए इन्हें कागज में लपेटकर जेब में रख लिया जाए। उसने एक पुड़िया बनाने का नाटक किया और उसी दौरान हाथ की सफाई दिखाते हुए असली गहने अपने कब्जे में कर लिए। पीड़ित को जो कागज की पुड़िया वापस दी गई, उसमें सोने के जेवर नहीं बल्कि पत्थर के दो टुकड़े रख दिए गए। ठग ने जाते-जाते व्यवसायी को यह भी हिदायत दी कि “इसे सीधे घर जाकर ही खोलना, रास्ते में मत देखना।” इसी आत्मविश्वास और धौंस के कारण पीड़ित को उस समय कोई शक नहीं हुआ।
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जब नंदकिशोर पाहूजा अपने घर पहुंचे और पुड़िया खोली, तो उनके होश उड़ गए। सोने की चमक की जगह जब अंदर पत्थर के टुकड़े मिले, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ बेहद सुनियोजित तरीके से ठगी हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने तुरंत कोतवाली थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित का कहना है कि ठग ने इस तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव और अधिकार का भ्रम पैदा किया कि उस समय वह न तो विरोध कर सके और न ही किसी से मदद मांग सके। यही बात इस पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना देती है।
इस वारदात ने मुंगेर शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना ऐसे इलाके में हुई, जिसे शहर का व्यस्त और संवेदनशील केंद्र माना जाता है। दिन के उजाले में, भीड़भाड़ वाले स्थान के पास और आम आवाजाही के बीच इस तरह की वारदात होना इस बात का संकेत है कि अपराधी अब बेहद निडर और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर शहर के बीचोंबीच इस तरह कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर लाखों की ठगी कर सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा कितनी कमजोर है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और अब आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। कोतवाली थाना पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेला था या उसके साथ कोई और भी शामिल था। अक्सर इस तरह की ठगी में टीमवर्क देखने को मिलता है, जहां एक व्यक्ति बातचीत करता है, दूसरा आसपास की निगरानी करता है और तीसरा भागने के रास्ते को सुरक्षित रखता है। ऐसे में पुलिस अब पूरे इलाके में उस संदिग्ध की गतिविधियों और आवाजाही की पड़ताल कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों की मदद से आरोपी की पहचान जल्द सामने आ सकती है।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। आज के समय में कई ठग खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच, विजिलेंस, बैंक अधिकारी या सरकारी जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनके गहने, नकदी या अन्य कीमती सामान पर हाथ साफ कर देते हैं। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा हथियार उनका आत्मविश्वास, तेज भाषा और वर्दी/अधिकार का भ्रम होता है। लोग अक्सर सम्मान, डर या घबराहट में बिना पुष्टि किए उनकी बात मान लेते हैं और फिर ठगी का शिकार हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में पुलिस और प्रशासन की ओर से भी लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है। अगर कोई अनजान व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर सड़क पर, बाजार में या घर के बाहर गहने उतारने, सामान चेक कराने या निजी जानकारी देने को कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे समय में सबसे पहले उसकी पहचान पूछना, नजदीकी थाना या पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल करना और आसपास मौजूद लोगों को आवाज देना बेहद जरूरी है। आपकी तुरंत प्रतिक्रिया और जागरूकता ही ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।
फिलहाल मुंगेर में हुई यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस पर अब इस मामले के जल्द खुलासे का दबाव है, क्योंकि पीड़ित कोई आम राहगीर नहीं, बल्कि शहर के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं। अगर पुलिस इस बहरूपिये ठग को जल्द पकड़ने में सफल होती है, तो यह न केवल पीड़ित को न्याय दिलाएगा, बल्कि शहर में यह संदेश भी जाएगा कि अपराध चाहे जितनी चालाकी से किया जाए, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं है।
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