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किशनगंज के पूर्व DSP गौतम कुमार की ₹80 करोड़ की काली कमाई ने मचाई सनसनी, ED-EOU की जांच जारी
- Reporter 12
- 06 Apr, 2026
किशनगंज के पूर्व DSP गौतम कुमार की जांच में ₹80 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा। संपत्ति नेपाल, गंगटोक और बंगाल तक फैली, ED और EOU की कार्रवाई जारी, DSP के निलंबन की प्रक्रिया शुरू।
पटना/आलम की खबर:बिहार के पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे सरकारी तंत्र को हिलाकर रख दिया है। किशनगंज के पूर्व DSP गौतम कुमार की आय से अधिक संपत्ति की जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौकाने वाले हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संयुक्त जांच में अब तक पता चला है कि गौतम कुमार के नाम से लगभग 80 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति दर्ज है।
यह रकम इतनी विशाल है कि आम बिहारवासियों की आय से तुलना कर इसे समझा जा सकता है। राज्य में औसत वार्षिक आय लगभग 76–77 हजार रुपये मानी जाती है। इसका मतलब यह है कि करीब 1.25 लाख आम लोग मिलकर जितना कमाते हैं, उतनी अवैध संपत्ति अकेले एक पुलिस अधिकारी ने जमा कर रखी थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गौतम कुमार का काला धन नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल, सिक्किम और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। जानकारी के मुताबिक, गौतम कुमार ने 2007 में थानेदार के पद पर रहते हुए करीब 40 बीघा कृषि भूमि खरीदी थी, जिसमें से आधे दस्तावेज EOU के हाथ लग चुके हैं।
इतना ही नहीं, उन्होंने गंगटोक में आलीशान होटल, सिलीगुड़ी के मिरिक में चाय बागान और बंगला, नेपाल में बड़ा निवेश, और फारबिसगंज में कीमती जमीन-जायदाद में पैसा लगाया। जांच में यह भी सामने आया कि ये संपत्तियां कथित तौर पर उनकी पत्नी, नौकरानी और गर्लफ्रेंड के नाम पर थीं।
EOU ने उनकी नौकरानी, जो पश्चिम बंगाल की रहने वाली है, से बयान भी दर्ज किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौतम कुमार ने अपनी गर्लफ्रेंड के नाम कई प्लॉट खरीदे और नौकरानी लक्जरी वाहन थार से काम पर आती थी। इन खुलासों ने पुलिस महकमे और राज्य प्रशासन में सनसनी फैला दी है।
जांच के बीच ED ने सोमवार को गौतम कुमार को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाया है। माना जा रहा है कि जल्द ही उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। जांच के दौरान मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) से भी बड़ी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतम कुमार और किशनगंज के थानेदार रजनीश कुमार के बीच दिनभर में 40–50 बार संपर्क होता था। इस खुलासे के बाद रजनीश कुमार भी ED की रडार पर आ गए हैं।
इतना ही नहीं, जांच की आंच किशनगंज के एक पूर्व एसपी और अन्य पुलिसकर्मियों तक भी पहुंच सकती है। यह मामला न केवल एक अधिकारी की काली कमाई का है, बल्कि बिहार के प्रशासनिक ढांचे और पुलिसिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद पुलिस मुख्यालय ने सख्त कदम उठाते हुए गौतम कुमार को फील्ड पोस्टिंग से हटा कर मुख्यालय में अटैच कर दिया। आईजी (मुख्यालय) मनोज कुमार के आदेश के अनुसार उन्हें लाइन क्लोज कर दिया गया और उनके निलंबन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर मुहर लग सकती है।
जांच एजेंसियों ने पहले भी 28 और 30 मार्च को पटना, किशनगंज और पूर्णिया में छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई दस्तावेज, रजिस्टर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। छापेमारी ने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर किया और यह साबित किया कि कई अधिकारी अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार के नेटवर्क में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं हैं, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक ढांचे की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं। बिहार पुलिस में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह मामला एक गंभीर चेतावनी भी है।
स्थानीय लोगों और मीडिया में इस खुलासे ने भारी चर्चा मचा दी है। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित मामला होगा या अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारियों तक भी जांच बढ़ेगी। फिलहाल ED और EOU पूरी गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले ने राज्य प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। कानून व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई समय-समय पर जारी रहेगी।
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