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जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव: बाहर पढ़ने वाले छात्र नहीं भर सकेंगे सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म

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बिहार में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हैं। इस बार डिजिटल प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसमें राज्य से बाहर पढ़ने वाले छात्र सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म नहीं भर सकेंगे।

पटना/आलम की खबर:देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाने वाली जनगणना 2027 को लेकर बिहार में तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। इस बार की जनगणना कई मायनों में अलग और आधुनिक होने जा रही है, क्योंकि इसे बड़े पैमाने पर डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। हालांकि, इसी डिजिटल प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण बदलाव ने खासकर छात्रों के बीच चर्चा को जन्म दे दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र बिहार से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वे इस बार ऑनलाइन ‘सेल्फ-इन्युमरेशन’ फॉर्म नहीं भर सकेंगे।

डिजिटल जनगणना का नया स्वरूप

इस बार जनगणना को पूरी तरह आधुनिक और तकनीकी रूप देने की कोशिश की जा रही है। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बन सके। लेकिन इस सुविधा के साथ कुछ स्पष्ट नियम भी तय किए गए हैं, जिनका पालन अनिवार्य होगा।

पटना के जिलाधिकारी Dr. Thyagarajan SM ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार की जनगणना में हर चरण को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है, ताकि डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे।

सेल्फ-इन्युमरेशन फॉर्म पर नया नियम

प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन सेल्फ-इन्युमरेशन की सुविधा केवल उन लोगों के लिए उपलब्ध होगी, जो अपने स्थायी या वर्तमान निवास स्थान पर रह रहे हैं। जो छात्र राज्य से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वे इस सुविधा का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि जनगणना का उद्देश्य व्यक्ति की वास्तविक उपस्थिति और निवास स्थान के आधार पर सटीक आंकड़े तैयार करना है। ऐसे में बाहर रह रहे छात्रों की जानकारी उनके वर्तमान स्थान के आधार पर दर्ज की जाएगी, न कि उनके मूल निवास के आधार पर।

किन लोगों को मिलेगी छूट

हालांकि प्रशासन ने कुछ श्रेणियों को इस नियम से छूट दी है। किराये के मकानों में रहने वाले लोग और प्रवासी मजदूर, जो अपने कार्यस्थल पर निवास कर रहे हैं, वे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

इसके लिए भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए जनगणना पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जहां कुल 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने होंगे। इन सवालों में परिवार, शिक्षा, रोजगार और आवास से संबंधित जानकारी शामिल होगी।

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

जनगणना 2027 को दो प्रमुख चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 2 मई से 31 मई तक मकानों की गिनती और नंबरिंग की जाएगी। इस दौरान हर घर को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी।

इसके पहले 1 मई तक लोगों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।

पटना जिले में व्यापक तैयारी

पटना जिले में इस अभियान को लेकर बड़े स्तर पर तैयारी की गई है। पूरे जिले को 46 चार्ज क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहां हजारों जनगणनाकर्मी और पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।

इसके अलावा जीविका समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं भी जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग ले सकें और सही जानकारी प्रदान करें।

डेटा की गोपनीयता पर जोर

जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इस डेटा का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा।

साथ ही यह भी बताया गया है कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा, जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

विकास योजनाओं की आधारशिला

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना के आंकड़े किसी भी देश की विकास योजनाओं की नींव होते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती हैं।

ऐसे में सटीक और सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी बन जाती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर जनगणना 2027 बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया साबित होने जा रही है, जिसमें डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। हालांकि नए नियमों के कारण कुछ वर्गों को बदलाव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इसका उद्देश्य डेटा को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। अब जरूरी है कि लोग इस प्रक्रिया को समझें और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि राज्य और देश के विकास की दिशा सही तय की जा सके।

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