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बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल खत्म होने के संकेत, सरकार से बातचीत को तैयार संघ

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बिहार में लंबे समय से जारी राजस्व अधिकारियों की हड़ताल खत्म होने के संकेत मिल रहे हैं। संघ ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं और सकारात्मक पहल होने पर काम पर लौटने की बात कही है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में पिछले डेढ़ महीने से जारी राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है और हालात ऐसे बन रहे हैं कि लंबे समय से जारी गतिरोध जल्द खत्म हो सकता है, क्योंकि बिहार राजस्व सेवा संघ ने नई सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए साफ संकेत दिया है कि यदि सरकार सकारात्मक रुख अपनाती है और लंबित मुद्दों पर सहमति बनती है, तो अधिकारी तुरंत अपने काम पर लौटने के लिए तैयार हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और जमीन से जुड़े रुके हुए कामों की रफ्तार फिर से तेज हो सकती है।

दरअसल, इस हड़ताल के कारण राज्यभर में जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य जैसे रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और मापी लगभग ठप पड़ गए थे, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के साथ-साथ रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ा है, क्योंकि जमीन से जुड़े छोटे से छोटे काम के लिए लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, लेकिन काम नहीं हो पा रहा था, ऐसे में अब इस गतिरोध के खत्म होने की संभावना से लोगों के बीच उम्मीद की किरण जगी है।

राजस्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं और सरकार के साथ संवाद के लिए पूरी तरह तैयार हैं, संघ के अध्यक्ष Aditya Shivam Shankar ने कहा है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सहमति जताती है और आंदोलन के दौरान की गई निलंबन जैसी कार्रवाई वापस ली जाती है, तो हड़ताल को तत्काल समाप्त कर दिया जाएगा और सभी अधिकारी अपने-अपने अंचलों में लौटकर काम शुरू कर देंगे।

इस पूरे विवाद की जड़ में डीसीएलआर यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स के पद को लेकर उत्पन्न हुआ असंतोष है, जहां राजस्व अधिकारियों का कहना है कि सेवा नियमों के अनुसार नौ वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें इस पद पर पदोन्नति मिलनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे उनके अधिकारों का हनन हो रहा है और यही कारण है कि उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया।

संघ की पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि उस कैबिनेट प्रस्ताव को वापस लिया जाए, जिसके तहत डीसीएलआर के पद को प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए खोल दिया गया है, राजस्व अधिकारियों का मानना है कि यह पद उनकी सेवा के लिए निर्धारित है और इसमें बदलाव करना नियमों के खिलाफ है, इसलिए इसे पहले की व्यवस्था के अनुसार बहाल किया जाना चाहिए।

दूसरी प्रमुख मांग जिला भू-अर्जन अधिकारी के पद को लेकर है, जहां भी राजस्व सेवा के अधिकारियों का दावा है कि यह पद उनके लिए आरक्षित है, लेकिन वर्तमान में यहां भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जिससे उनके करियर ग्रोथ और सेवा संरचना पर असर पड़ रहा है, ऐसे में वे चाहते हैं कि इस व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

इस हड़ताल का असर केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ा है, क्योंकि 9 मार्च से जारी इस आंदोलन के चलते राज्यभर में जमीन से जुड़े कामों की गति लगभग रुक गई है, जिससे लोग परेशान हैं और कई जरूरी कार्य लंबित पड़े हैं, खासकर वे लोग जो जमीन खरीद-बिक्री या म्यूटेशन के लिए आवेदन कर चुके हैं, उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि विभाग की ओर से यह दावा किया गया है कि कुल 1100 में से करीब 589 अधिकारी काम पर लौट चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है, क्योंकि कई अंचलों में कामकाज प्रभावित है और लोग अभी भी समाधान का इंतजार कर रहे हैं।

राजस्व अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों को बाधित करना नहीं है, बल्कि वे केवल अपनी सेवा शर्तों में न्याय चाहते हैं और यदि सरकार उनकी पुरानी मांगों पर लिखित आश्वासन देती है, तो वे बिना किसी देरी के हड़ताल समाप्त कर देंगे और अपने दायित्वों का निर्वहन शुरू कर देंगे।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि नई सरकार के सामने यह पहला बड़ा कर्मचारी आंदोलन है, जिसे सुलझाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है, ऐसे में सरकार के रुख और फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

कुल मिलाकर बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब खत्म होने की कगार पर नजर आ रही है और यदि सरकार तथा संघ के बीच सहमति बन जाती है, तो आने वाले दिनों में अंचल कार्यालयों में एक बार फिर सामान्य कामकाज शुरू हो सकता है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी और लंबे समय से रुके हुए कार्य तेजी से निपटाए जा सकेंगे।

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