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मुजफ्फरपुर ट्यूशन केस में बड़ा फैसला: नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के दोषी शिक्षक को 3 साल की सजा

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मुजफ्फरपुर में ट्यूशन शिक्षक पर नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक गंभीर और शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने शिक्षक और छात्र के पवित्र रिश्ते पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्यूशन पढ़ाने के नाम पर एक नाबालिग छात्रा के साथ गलत हरकत करने के आरोप में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी शिक्षक को दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है। यह फैसला उस परिवार और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था।यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के कटरा थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां 16 वर्षीय मैट्रिक की छात्रा अपने ही गांव के एक शिक्षक मो. सितारे के पास ट्यूशन पढ़ने जाती थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य और भरोसेमंद माहौल में चल रहा था, लेकिन धीरे-धीरे शिक्षक का व्यवहार बदलने लगा। छात्रा के अनुसार, पढ़ाई के दौरान वह बार-बार उसके साथ अनुचित व्यवहार करने लगा, जिससे छात्रा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।

समय बीतने के साथ आरोपी शिक्षक का व्यवहार और अधिक असामान्य होता गया। आरोप है कि वह छात्रा पर शादी करने का दबाव बनाने लगा और जब छात्रा ने साफ इनकार कर दिया, तो उसने उसे अलग से मिलने के लिए बुलाना शुरू कर दिया। एकांत का फायदा उठाकर वह लगातार उसके साथ गलत हरकतें करता रहा। छात्रा डर, शर्म और सामाजिक दबाव के कारण लंबे समय तक चुप रही, लेकिन हालात बिगड़ने पर उसने विरोध करना शुरू किया।

छात्रा के विरोध के बाद भी आरोपी का रवैया नहीं बदला। उल्टा उसने गांव में उसके खिलाफ गलत अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं, जिससे छात्रा और उसका परिवार मानसिक तनाव में आ गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब छात्रा अपने परिवार के साथ आरोपी के घर शिकायत लेकर पहुंची। वहां भी उनके साथ दुर्व्यवहार और कथित तौर पर मारपीट जैसी घटनाएं हुईं, जिससे मामला पूरी तरह से गंभीर हो गया।

आखिरकार छात्रा ने साहस दिखाते हुए 27 अप्रैल 2025 को कटरा थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद मामला विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 में विचाराधीन हुआ।

Muzaffarpur में चले इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी गवाहों और साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार ने अदालत में पांच महत्वपूर्ण गवाह पेश किए, जिन्होंने घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

मामले में फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्र ने आरोपी मो. सितारे को तीन साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि सीधे पीड़ित छात्रा को दी जाएगी, ताकि उसे आंशिक आर्थिक सहायता मिल सके। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

यह मामला केवल एक कानूनी फैसला नहीं बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह के गलत व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षक का स्थान समाज में सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन जब वही पद गलत दिशा में इस्तेमाल होता है, तो उसका असर पीड़ित और पूरे समाज पर गहरा पड़ता है।

इस केस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में ट्यूशन और निजी शिक्षा केंद्रों में निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है। कई बार भरोसे के नाम पर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।

पीड़ित छात्रा और उसका परिवार लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहा था। अदालत के इस फैसले के बाद उन्हें आंशिक राहत जरूर मिली है, लेकिन मानसिक आघात और सामाजिक प्रभाव को भरना आसान नहीं होगा।

इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने भी अदालत के निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

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