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Bihar Cyber Crime: साइबर ठगी पर लगाम के लिए नई पहल, पटना पुलिस ने जीविका दीदियों को बनाया जागरूकता दूत

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बिहार में बढ़ते साइबर अपराध को रोकने के लिए पटना पुलिस ने जीविका दीदियों को ट्रेनिंग देकर गांव-गांव जागरूकता अभियान शुरू किया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध को रोकने के लिए अब एक नई और जमीनी स्तर की रणनीति अपनाई जा रही है, जिसके तहत पटना पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए जीविका दीदियों को आगे किया है, यह पहल इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अब साइबर ठगी का दायरा शहरों से निकलकर गांवों तक तेजी से फैल रहा है और बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग इसका शिकार बन रहे हैं, ऐसे में पुलिस ने यह समझा कि यदि गांव-गांव तक सही जानकारी पहुंचाई जाए तो इन घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डिजिटल युग में जहां एक ओर ऑनलाइन लेन-देन और स्मार्टफोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं और अब वे सीधे ग्रामीण इलाकों को निशाना बना रहे हैं, कई मामलों में देखा गया है कि लोगों को झूठे कॉल, फर्जी लिंक और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ठगा जा रहा है, खासकर वे लोग जो डिजिटल तकनीक से पूरी तरह परिचित नहीं हैं, वे आसानी से इन जाल में फंस जाते हैं, यही वजह है कि अब जागरूकता को ही सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है।

पटना साइबर पुलिस की इस पहल में जीविका दीदियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका नेटवर्क पहले से ही गांवों और पंचायतों तक फैला हुआ है और ये महिलाओं के स्वयं सहायता समूह के जरिए लोगों से सीधे जुड़ी रहती हैं, पुलिस का मानना है कि यदि इन्हें सही प्रशिक्षण दिया जाए तो ये अपने-अपने क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा की जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचा सकती हैं और लोगों को ठगी से बचने के उपाय बता सकती हैं।

इस कार्यक्रम के तहत जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें उन्हें साइबर अपराध के नए-नए तरीकों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है, उन्हें यह समझाया जा रहा है कि किस तरह ठग फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और कैसे थोड़ी सी सावधानी बरतकर इनसे बचा जा सकता है, प्रशिक्षण में खास तौर पर यह जोर दिया जा रहा है कि किसी भी अनजान लिंक या एप्लिकेशन को डाउनलोड न करें और बिना सत्यापन के किसी को भी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

इसके साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि गूगल या इंटरनेट पर दिखने वाले कस्टमर केयर नंबरों पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि कई बार ये नंबर फर्जी होते हैं और इनके जरिए लोगों को ठगा जाता है, इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले संदिग्ध संदेशों से भी सावधान रहने की सलाह दी जा रही है, ताकि लोग किसी भी तरह के लालच या डर में आकर गलत कदम न उठाएं।

ग्रामीण क्षेत्रों में खास तौर पर सरकारी योजनाओं के नाम पर भी साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें किसानों, छात्रों और पेंशनधारकों को निशाना बनाया जाता है, ऐसे में जीविका दीदियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे लोगों को इन फर्जीवाड़ों के बारे में जागरूक करें और उन्हें बताएं कि किसी भी योजना से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें, ताकि वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बच सकें।

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष पटना जिले में साइबर ठगी के हजारों मामले दर्ज किए गए थे, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या कितनी तेजी से बढ़ रही है, पहले जहां ये घटनाएं मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित थीं, वहीं अब गांवों में भी इनका प्रभाव देखने को मिल रहा है, ऐसे में यह पहल समय की जरूरत मानी जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान के तहत हर पंचायत स्तर पर टीम बनाई जा रही है, जो नियमित रूप से लोगों को जागरूक करेगी और यदि कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि होती है तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, इससे न केवल अपराध को रोका जा सकेगा बल्कि लोगों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ेगी।

कुल मिलाकर यह पहल बिहार में साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है, जिसमें तकनीक के साथ-साथ सामाजिक भागीदारी को भी जोड़ा गया है, यदि यह अभियान सफल होता है तो आने वाले समय में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे पूरे राज्य में साइबर सुरक्षा का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो सकेगा और लोग डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षित महसूस कर पाएंगे।

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