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पटना में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: 126 मामलों में जुर्माना, 25 पर अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश

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पटना में लोक शिकायत निवारण मामलों में लापरवाही पर जिला प्रशासन ने 126 मामलों में जुर्माना लगाया है और 25 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की है।

पटना/आलम की खबर:राजधानी पटना में लोक शिकायत निवारण से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। त्यागराजन एसएम के नेतृत्व में की गई समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई मामलों में निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं किया गया, जिसके बाद 126 मामलों में आर्थिक दंड लगाया गया है। इन मामलों में कुल 3 लाख 47 हजार 800 रुपये का जुर्माना तय किया गया है, जो संबंधित अधिकारियों से वसूला जा रहा है। इसके साथ ही 25 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 2 लाख 92 हजार 900 रुपये की राशि वसूल की जा चुकी है, जबकि बाकी राशि जल्द जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निर्धारित समय के भीतर राशि जमा नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारियों के वेतन से कटौती की जाएगी। इस तरह की सख्ती से यह संकेत दिया गया है कि काम में लापरवाही अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत हर मामले का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि कोई अधिकारी केवल औपचारिक रूप से मामलों को बंद कर देता है या शिकायतकर्ता की संतुष्टि सुनिश्चित नहीं करता, तो उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रति मामले के हिसाब से आर्थिक दंड का प्रावधान लागू किया गया है, ताकि अधिकारी गंभीरता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों का निपटारा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी जरूरी है कि शिकायतकर्ता संतुष्ट हो। उन्होंने कहा कि कई बार देखा जाता है कि कागजों पर मामला बंद कर दिया जाता है, लेकिन वास्तविक समस्या का समाधान नहीं होता। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह जिले में कुल 165 नई शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि 218 मामलों का निष्पादन किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी मामलों का निष्पादन 60 कार्य दिवस की निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जा रहा है और फिलहाल कोई भी आवेदन लंबित नहीं है, जो प्रशासन के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

अपील मामलों की स्थिति पर भी जिलाधिकारी ने विस्तृत जानकारी दी। प्रथम अपील के हजारों मामलों में से अधिकांश का निष्पादन किया जा चुका है और शेष मामलों पर भी तेजी से काम चल रहा है। इसी तरह द्वितीय अपील के मामलों में भी बड़ी संख्या में निपटारा किया गया है। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर मामलों को लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से समाधान पर जोर दिया जा रहा है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि लोक शिकायत निवारण और आरटीपीएस से जुड़े मामलों में यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपीलीय प्राधिकार और अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की खुद सुनवाई करें और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाएं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर स्तर पर जिम्मेदारी तय हो और किसी भी स्तर पर ढिलाई न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आता है और आम जनता का भरोसा भी बढ़ता है। जब अधिकारी जानते हैं कि उनके काम की नियमित समीक्षा हो रही है और लापरवाही पर दंड तय है, तो वे अपने कार्यों को अधिक गंभीरता से लेते हैं। इससे न केवल शिकायतों का समाधान बेहतर तरीके से होता है, बल्कि शासन की छवि भी मजबूत होती है।

पटना जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जहां जवाबदेही तय करते हुए सख्त कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में इसका असर अन्य जिलों में भी देखने को मिल सकता है, जहां इसी तरह की व्यवस्था लागू कर प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, लोक शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए पटना प्रशासन का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जनता की शिकायतों के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों को हर हाल में जवाब देना होगा।

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