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मोतिहारी बापूधाम स्टेशन पर 21 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू, मानव तस्करी और धर्मांतरण एंगल से जांच तेज

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मोतिहारी बापूधाम रेलवे स्टेशन पर RPF और चाइल्ड हेल्पलाइन ने 21 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। बच्चों को पढ़ाई के नाम पर ले जाया जा रहा था, पुलिस मानव तस्करी और धर्मांतरण एंगल से जांच कर रही है।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार के मोतिहारी जिले में स्थित बापूधाम रेलवे स्टेशन पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त कार्रवाई में 21 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इस घटना ने न केवल रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की आशंका भी पैदा कर दी है।

यह पूरा मामला Motihari के बापूधाम रेलवे स्टेशन का है, जहां सूचना मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी बच्चों को पढ़ाई और बेहतर भविष्य का झांसा देकर ले जाया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, बच्चों को मोतिहारी शहर के चांदमारी इलाके के एक होटल में ठहराया गया था, जहां से उन्हें आगे भागलपुर ले जाने की योजना थी। इसी दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना मिली, जिसके बाद RPF टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर पूरे मामले का खुलासा किया।

रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे कथित रूप से आदिवासी समुदाय से संबंध रखते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि किसी भी बच्चे के पास पहचान पत्र या वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे। इससे यह आशंका और गहरी हो गई कि यह एक सुनियोजित मानव तस्करी का मामला हो सकता है।

आरपीएफ ने इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान फोनसिस क्रिसपोटा, रांची निवासी के रूप में हुई है। हालांकि पूछताछ के दौरान वह बच्चों को ले जाने के उद्देश्य पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पुलिस अब उसके नेटवर्क और संपर्कों की जांच कर रही है।

जीआरपी प्रभारी संतोष कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम सक्रिय हुई और बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। सभी बच्चों को फिलहाल चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और पहचान प्रक्रिया जारी है।

Railway Protection Force और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला केवल पढ़ाई का नहीं लग रहा है, बल्कि इसके पीछे मानव तस्करी का नेटवर्क होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस को यह भी आशंका है कि इस पूरे मामले में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एंगल भी हो सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां हर पहलू को ध्यान में रखते हुए छानबीन कर रही हैं।

स्थानीय प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। होटल, ट्रैवल रूट और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चों को कहां से और कैसे लाया गया था।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि नाबालिग बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और क्या मानव तस्करी के गिरोह अब भी सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संगठित नेटवर्क शामिल हो सकता है, जो बच्चों को झूठे वादों के जरिए दूसरे राज्यों तक पहुंचाता है।

स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई की सराहना की है और कहा है कि अगर समय पर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन सक्रिय नहीं होती, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता था।

फिलहाल सभी 21 बच्चों को सुरक्षित रखा गया है और उनकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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