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बिहार में जमीन खरीदने वालों को बड़ी राहत, रजिस्ट्री से पहले ऑनलाइन मिलेगी विवाद और मालिकाना हक की पूरी जानकारी

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बिहार सरकार जमीन खरीद-बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने जा रही है। अब रजिस्ट्री से पहले खरीदार ऑनलाइन आवेदन कर जान सकेंगे कि जमीन विवादित है या नहीं। 10 दिनों में पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।

पटना/आलम की खबर: बिहार में जमीन खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब राज्य में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकेगा कि संबंधित जमीन विवादित है या नहीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन के मालिकाना हक, जमाबंदी, सीमांकन और अन्य कानूनी स्थिति की आधिकारिक जांच की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और भविष्य में होने वाले विवादों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

राज्य सरकार ने इसके लिए नई प्रक्रिया तैयार कर ली है। इस नई व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले खरीदार को ऑनलाइन आवेदन देना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचलाधिकारी यानी सीओ उस जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करेंगे। जांच पूरी होने के बाद 10 दिनों के भीतर आवेदक को पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही आवेदनकर्ता को एसएमएस के माध्यम से भी जानकारी भेजी जाएगी।

सरकार की इस पहल को जमीन खरीद-बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से बिहार में जमीन विवाद एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। कई बार लोग अधूरी जानकारी या गलत दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें कानूनी विवाद, फर्जीवाड़ा या मालिकाना हक से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, Revenue and Land Reforms Department और Prohibition, Excise and Registration Department ने संयुक्त रूप से इस योजना की तैयारी पूरी कर ली है। सभी जिलों के अंचल पदाधिकारियों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। इसके अलावा जमीन निबंधन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मोबाइल यूनिट की व्यवस्था भी तैयार की गई है। संभावना जताई जा रही है कि इसी महीने से यह नई व्यवस्था राज्यभर में लागू कर दी जाएगी।

नई प्रणाली लागू होने के बाद रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को निबंधन पोर्टल पर जमीन से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें संबंधित निबंधन कार्यालय का नाम, अंचल, मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा संख्या, जमीन का रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी विवरण, जमाबंदी धारक का नाम और क्रेता-विक्रेता की जानकारी शामिल होगी। इन जानकारियों के आधार पर अंचल कार्यालय जमीन की पूरी स्थिति की जांच करेगा।

अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कई मामलों में जमीन की रजिस्ट्री केवल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर हो जाती थी। बाद में सीमांकन, वास्तविक मालिक, फर्जी दस्तावेज या दोहरी बिक्री जैसी समस्याएं सामने आती थीं। इससे खरीदारों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ती थी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से लोगों को पहले ही जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल जाएगी।

यह पूरी पहल बिहार सरकार की सात निश्चय-3 योजना के अंतर्गत “सबका सम्मान, जीवन आसान” अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। सरकार दस्तावेज निबंधन प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना चाहती है। इसी उद्देश्य से 16 फरवरी को दोनों विभागों की ओर से सभी जिलाधिकारियों को संयुक्त पत्र भेजा गया था, जिसमें इस नई व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए थे।

पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि जमीन की अधूरी या गलत जानकारी के कारण रजिस्ट्री के बाद अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो रहे हैं। कई मामलों में खरीदारों को यह तक पता नहीं होता कि जिस जमीन की रजिस्ट्री कराई जा रही है, उस पर पहले से कोई विवाद या दावा लंबित है। ऐसे मामलों से बचाव के लिए अब इच्छुक पक्षकारों को आधिकारिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

Ajay Yadav ने कहा कि जमीन निबंधन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को जमीन खरीदने से पहले ही संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां जमीन विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं, वहां यह व्यवस्था काफी प्रभावी साबित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर जमीन सीमांकन, जमाबंदी और वारिसों के अधिकार को लेकर विवाद होते रहते हैं। कई बार एक ही जमीन को दो लोगों को बेचने जैसे मामले भी सामने आते हैं। नई व्यवस्था ऐसे मामलों को कम करने में मददगार हो सकती है।

जमीन खरीदने वाले लोगों के बीच भी इस नई व्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले सरकार की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट मिल जाएगी तो वे अधिक सुरक्षित तरीके से जमीन खरीद सकेंगे। इससे भविष्य में कोर्ट-कचहरी के चक्कर और आर्थिक नुकसान से बचाव संभव होगा।

इधर सरकार मोबाइल यूनिट की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में भी सेवाएं पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अंचल कार्यालय या निबंधन कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशासन का कहना है कि डिजिटल तकनीक के जरिए पूरी प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल राज्यभर में इस नई व्यवस्था को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो बिहार में जमीन खरीद-बिक्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इससे जमीन विवादों में कमी आएगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

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