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मोतिहारी में PDS व्यवस्था पर सवाल, फिंगर लगवाकर राशन की जगह रुपये देने का वीडियो वायरल

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पूर्वी चम्पारण के सुगौली प्रखंड में पीडीएस दुकानदार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में लाभुकों से फिंगरप्रिंट लेने के बाद राशन की जगह नकद रुपये देने का आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।

मोतिहारी/आलम की खबर:पूर्वी चम्पारण जिले के सुगौली प्रखंड से जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ा एक कथित वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में लाभुकों को सरकारी राशन देने के बजाय नकद रुपये दिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच भारी नाराजगी है और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है।

बताया जा रहा है कि मामला सुगौली प्रखंड की दक्षिण छपरा बहास पंचायत के मेहवा गांव से जुड़ा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग पीडीएस मशीन पर अंगूठा लगाते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद लाभुकों को निर्धारित अनाज देने के बजाय नकद पैसे थमा दिए जा रहे हैं। हालांकि वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए सस्ते या मुफ्त दर पर राशन उपलब्ध कराती है। लेकिन यदि राशन वितरण में इस तरह की अनियमितता हो रही है, तो यह सीधे गरीबों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। लोगों का आरोप है कि राशन वितरण प्रणाली में लंबे समय से गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसे मामलों को बढ़ावा मिला।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई लाभुकों को हर महीने पूरा राशन नहीं मिलता। कुछ मामलों में मशीन पर अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड में पूरा वितरण दिखा दिया जाता है, जबकि वास्तविक रूप से कम अनाज दिया जाता है। अब वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेगा और जांच कर सच्चाई सामने लाएगा।

कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कई बार लाभुकों को कहा जाता है कि राशन उपलब्ध नहीं है या बाद में मिलेगा। वहीं रिकॉर्ड में वितरण पूरा दिखा दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वीडियो की निष्पक्ष जांच हो तो राशन वितरण व्यवस्था में बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आ सकती है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पंचायत ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोग वीडियो को शेयर कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की जांच कराने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा गरीबों के लिए भेजा गया अनाज यदि सही लाभुकों तक नहीं पहुंच रहा, तो इससे सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। लोगों ने मांग की है कि केवल संबंधित दुकानदार ही नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था की जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है। गरीबों के लिए निर्धारित खाद्यान्न में गड़बड़ी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। पंचायत स्तर पर भी लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग करते हुए दोषियों के लाइसेंस रद्द करने की बात कही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में पीडीएस व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया गया था ताकि फर्जी वितरण और कालाबाजारी पर रोक लग सके। लेकिन यदि मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद राशन के बजाय नकद पैसे दिए जा रहे हैं, तो यह व्यवस्था की मूल भावना पर सवाल खड़ा करता है।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब परिवारों तक सस्ता अनाज समय पर पहुंचे। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आबादी आज भी पीडीएस प्रणाली पर निर्भर है। ऐसे में राशन वितरण में गड़बड़ी सीधे गरीब परिवारों के जीवन पर असर डालती है।

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। विपक्षी दलों और स्थानीय संगठनों ने कहा है कि यदि प्रशासन समय पर कार्रवाई नहीं करता तो लोगों का भरोसा सरकारी योजनाओं से उठ सकता है। वहीं कुछ लोगों ने पूरे जिले में पीडीएस दुकानों की जांच कराने की मांग भी की है।

हालांकि इस पूरे मामले में अब तक संबंधित विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी वीडियो की सत्यता की जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कर रहे हैं। लेकिन वायरल वीडियो के बाद विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है तो इससे अन्य पीडीएस दुकानदारों को भी संदेश जाएगा कि गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। लोगों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पीडीएस व्यवस्था की नियमित निगरानी, लाभुकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे। कई जगहों पर लाभुकों को अपने अधिकारों और निर्धारित राशन की मात्रा की जानकारी नहीं होती, जिसका फायदा उठाकर गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है।

फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन वायरल वीडियो की जांच कितनी तेजी और निष्पक्षता से करता है तथा दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

कुल मिलाकर सुगौली से सामने आया यह वायरल वीडियो बिहार की जनवितरण प्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है। गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता दोनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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