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बैलेट पेपर बनाम EVM पर फिर गरमाई सियासत, भोजपुर-बक्सर MLC उपचुनाव जीत के बाद तेजस्वी का NDA पर बड़ा हमला

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भोजपुर-बक्सर MLC उपचुनाव में RJD की जीत के बाद तेजस्वी यादव का बड़ा बयान, बोले- बैलेट पेपर से चुनाव हो तो NDA कहीं नहीं टिकेगा

पटना/आलम की खबर:भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार विधान परिषद उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की जीत के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और बैलेट पेपर की बहस के केंद्र में आ गई है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने चुनाव परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि जहां-जहां बैलेट पेपर से चुनाव हुए हैं, वहां जनता का वास्तविक जनादेश सामने आया है और यदि देशभर में चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं तो बीजेपी और NDA की स्थिति बेहद कमजोर हो जाएगी।

भोजपुर-बक्सर एमएलसी सीट पर हुए उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय की जीत को विपक्ष ने अपनी राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन का प्रमाण बताया है। यह सीट पहले जनता दल यूनाइटेड के कब्जे में थी, लेकिन पूर्व विधान पार्षद के विधायक बनने के बाद सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में राजद उम्मीदवार ने जेडीयू प्रत्याशी को सैकड़ों मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। परिणाम सामने आने के बाद राजद खेमे में उत्साह का माहौल दिखा और पार्टी नेताओं ने इसे जनता की नाराजगी का संकेत बताया।

तेजस्वी यादव ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चुनाव बैलेट पेपर से कराया गया था, इसलिए मतदाताओं की असली राय सामने आ सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि EVM आधारित चुनावों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और जनता के मन में भी संदेह की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब मशीन से वोटिंग होने के बावजूद मतगणना में घंटों का समय लगता है, तो फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराने में आखिर परेशानी क्या है। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है।

राजद नेता ने दावा किया कि यदि पिछला बिहार विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर से कराया गया होता तो महागठबंधन को कहीं अधिक सीटें मिलतीं। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई तरह की शंकाएं बनी रहीं। हालांकि उन्होंने किसी विशेष तकनीकी गड़बड़ी का प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया, लेकिन EVM की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर उठाए। तेजस्वी ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता सबसे अहम होती है और चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिस पर हर राजनीतिक दल और मतदाता को पूर्ण भरोसा हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले EVM बनाम बैलेट पेपर का मुद्दा एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विमर्श बन सकता है। विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार EVM को सुरक्षित और विश्वसनीय बताते रहे हैं। इससे पहले भी कई विपक्षी दल समय-समय पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठा चुके हैं।

भोजपुर-बक्सर एमएलसी सीट का चुनाव स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के वोट से संपन्न हुआ था। इस चुनाव में पंचायत प्रतिनिधियों, वार्ड सदस्यों और स्थानीय निकाय से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मतदान किया। परिणाम आने के बाद राजद कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर जश्न मनाया और इसे बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि ग्रामीण इलाकों और स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के बीच सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है, जिसका असर चुनाव परिणाम में दिखाई दिया।

दूसरी ओर NDA नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा और जेडीयू नेताओं का कहना है कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो EVM सही लगती है और हारने पर मशीनों पर सवाल उठाए जाते हैं। NDA नेताओं ने राजद पर राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तेजस्वी यादव लगातार रोजगार, शिक्षा, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों के साथ-साथ चुनावी पारदर्शिता को भी जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद बिहार में विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा है और ऐसे में उपचुनाव की जीत को राजद बड़े मनोबल के रूप में पेश कर रहा है।

बिहार की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब EVM पर विवाद उठा हो। देश के अलग-अलग राज्यों में चुनाव परिणाम आने के बाद कई राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि अब तक चुनाव आयोग लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है। इसके बावजूद विपक्षी दल बैलेट पेपर की वापसी की मांग समय-समय पर दोहराते रहते हैं।

भोजपुर-बक्सर उपचुनाव के परिणाम ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार में राजनीतिक माहौल धीरे-धीेरे गर्म होने लगा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। राजद इस जीत को जनता के भरोसे की जीत बता रहा है, जबकि NDA इसे स्थानीय स्तर का सामान्य चुनाव परिणाम करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि EVM और बैलेट पेपर की बहस किस दिशा में जाती है और इसका बिहार की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

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