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Darbhanga Airport International Flights: दरभंगा एयरपोर्ट बनेगा इंटरनेशनल हब, बाबा विद्यापति के नाम पर नामकरण की तैयारी

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दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की घोषणा हुई है। जल्द अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी और एयरपोर्ट का नाम बाबा विद्यापति के नाम पर रखने की तैयारी है। बिहार में एयर कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ेगी।

दरभंगा/आलम की खबर:बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा सामने आई है। राज्य सरकार ने दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में औपचारिक पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में दरभंगा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू की जाएंगी, जिससे न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत की एयर कनेक्टिविटी को नई पहचान मिलेगी। इसके साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि एयरपोर्ट का नाम मिथिला के महान सांस्कृतिक प्रतीक बाबा विद्यापति के नाम पर रखा जाए।

दरभंगा एयरपोर्ट पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एयरपोर्ट परिसर का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक भी की। इस दौरान एयरपोर्ट के विस्तार, यात्री सुविधाओं और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि दरभंगा एयरपोर्ट आने वाले वर्षों में बिहार का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब बन सकता है।अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि दरभंगा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। अगले सप्ताह इस विषय पर एक विशेष बैठक प्रस्तावित है, जिसमें केंद्र सरकार और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

सरकार का लक्ष्य है कि बिहार में एयर कनेक्टिविटी को कई गुना बढ़ाया जाए ताकि आम लोगों की हवाई यात्रा तक पहुंच आसान हो सके। वर्तमान में राज्य में हवाई सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले पांच वर्षों में चार से पांच करोड़ यात्रियों के हवाई यात्रा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दरभंगा बनेगा मिथिलांचल का एयर हब

दरभंगा एयरपोर्ट पहले से ही उत्तर बिहार और सीमांचल के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की योजना के बाद यह क्षेत्र सीधे विदेशों से जुड़ सकेगा। इससे न केवल प्रवासी बिहारियों को लाभ मिलेगा बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दरभंगा से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होती हैं तो मिथिलांचल क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव आएगा। खासकर मिडिल ईस्ट और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होने से व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बाबा विद्यापति के नाम पर नामकरण की चर्चा

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि दरभंगा एयरपोर्ट का नाम मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक बाबा विद्यापति के नाम पर रखा जा सकता है। यह प्रस्ताव स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।

बाबा विद्यापति मिथिला की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह न केवल एक एयरपोर्ट का नाम होगा, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का भी माध्यम बनेगा।

बिहार में एयर कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में एयर कनेक्टिविटी की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले जहां बिहार में हवाई यात्रा बहुत सीमित थी, वहीं आज लाखों लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पूर्णिया एयरपोर्ट पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि मुजफ्फरपुर, रक्सौल, सहरसा और वीरपुर जैसे क्षेत्रों में एयरपोर्ट परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि जिन स्थानों पर पूर्ण एयरपोर्ट संभव नहीं है, वहां आधुनिक हेलीपैड विकसित किए जाएं ताकि हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए भी लोगों को तेज और सुरक्षित यात्रा सुविधा मिल सके।

2005 से अब तक बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2005 में बिहार में केवल ढाई लाख लोग ही हवाई यात्रा करते थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच चुकी है। यह राज्य में विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सड़क और रेल नेटवर्क में सुधार के साथ-साथ अब एयर कनेक्टिविटी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बिहार देश के प्रमुख परिवहन हब के रूप में विकसित हो सके।

दरभंगा एम्स और अन्य विकास परियोजनाएं

कार्यक्रम के दौरान दरभंगा एम्स परियोजना पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की ओर से वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। कुल मिलाकर हजारों करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी।

इसके साथ ही अशोक पेपर मिल क्षेत्र में नए उद्योगों को विकसित करने और लॉजिस्टिक पार्क जैसी परियोजनाओं को तेजी देने पर भी चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि जब तक परिवहन, स्वास्थ्य और उद्योग तीनों क्षेत्र एक साथ विकसित नहीं होंगे, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है।

मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने मिथिला की सांस्कृतिक विरासत और मखाना उत्पादन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मखाना उत्पादन को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे मिथिलांचल के किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है।

मिथिला क्षेत्र में मखाना, हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों की मजबूत पहचान है। अब जब एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो इन उत्पादों का निर्यात भी आसान हो जाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

विकास की नई उड़ान की ओर बिहार

दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की योजना को बिहार के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो मिथिलांचल क्षेत्र न केवल भारत बल्कि वैश्विक मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।

सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बिहार एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई छुएगा। दरभंगा एयरपोर्ट इस बदलाव का केंद्र बिंदु बन सकता है, जो न केवल यात्रियों को सुविधा देगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और पहचान दोनों को मजबूत करेगा।

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