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Muzaffarpur News: तिरहुत के 310 निजी स्कूलों को नोटिस, मनमानी फीस वसूली पर प्रशासन सख्त

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मुजफ्फरपुर समेत तिरहुत प्रमंडल के 3212 निजी स्कूलों की जांच में फीस वृद्धि और नियम उल्लंघन के मामले सामने आए। 310 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया जबकि 5 स्कूलों पर 1-1 लाख रुपये जुर्माने की कार्रवाई शुरू हुई।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:बिहार में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों के बीच अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी निगरानी रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी। अभिभावकों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रमंडल स्तर पर शुरू की गई बड़ी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि कई निजी विद्यालय नियमों को दरकिनार कर फीस में बढ़ोतरी करने, परिवहन शुल्क बढ़ाने तथा किताब और ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाने जैसे काम कर रहे थे।

प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर तिरहुत प्रमंडल के कुल 3212 निजी विद्यालयों की जांच कराई गई। जांच में वर्ष 2025-26 और 2026-27 की फीस संरचना, परिवहन शुल्क, किताब और यूनिफॉर्म की व्यवस्था समेत कई बिंदुओं की समीक्षा की गई। प्रशासनिक जांच में नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद 310 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के बाद निजी विद्यालयों के बीच हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि “बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019” के तहत सभी निजी विद्यालयों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से फीस बढ़ाना पूरी तरह अनुचित है। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों का आर्थिक शोषण न हो।

बताया गया कि अभिभावकों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल हर साल बिना किसी स्पष्ट आधार के फीस में भारी वृद्धि कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ स्कूल परिवहन शुल्क में भी लगातार बढ़ोतरी कर रहे थे। कई मामलों में यह भी शिकायत मिली कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य कर रहा था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और व्यापक जांच का आदेश दिया।

जांच के दौरान सबसे अधिक अनियमितताएं पश्चिम चंपारण जिले के विद्यालयों में सामने आईं। यहां कुल 72 विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया। इन मामलों की सुनवाई प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में की गई, जहां कई स्कूल संचालकों ने स्वीकार किया कि फीस में वृद्धि की गई थी। हालांकि प्रशासन की सख्ती के बाद कई विद्यालयों ने अपनी संशोधित फीस संरचना जारी करते हुए बढ़ी हुई राशि वापस लेने की बात कही है।

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सुनवाई के दौरान आयुक्त ने साफ निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूली है, वे अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करें या आगामी महीनों की फीस में समायोजित करें। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों को शिक्षा का केंद्र बने रहना चाहिए, न कि मुनाफा कमाने का माध्यम। प्रशासन किसी भी कीमत पर शिक्षा के व्यवसायीकरण को स्वीकार नहीं करेगा।

प्रशासनिक कार्रवाई के सबसे बड़े पहलुओं में से एक उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई रही जो सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। पश्चिम चंपारण जिले के पांच विद्यालयों पर अधिनियम की धाराओं के तहत 1-1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें संत करेंस विद्यालय, बेतिया, संत थॉमस स्कूल, चनपटिया तथा सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल, नौतन जैसे नाम शामिल हैं। इन विद्यालयों को अगली सुनवाई में हर हाल में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

आयुक्त ने कहा कि यदि कोई विद्यालय नियमों का लगातार उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन अब स्कूलों की शुल्क संरचना और अन्य व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करेगा ताकि भविष्य में अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस कार्रवाई के बाद अभिभावकों में राहत की भावना देखी जा रही है। लंबे समय से निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर अभिभावक परेशान थे। कई परिवारों का कहना था कि हर वर्ष अचानक फीस बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होता जा रहा था। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा था। अब प्रशासनिक कार्रवाई से लोगों को उम्मीद जगी है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

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शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह की जांच और कार्रवाई जारी रहेगी। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निजी विद्यालयों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि यदि किसी स्कूल द्वारा अनावश्यक शुल्क वसूला जाता है तो इसकी शिकायत सीधे संबंधित डीईओ कार्यालय में करें।

प्रमंडलीय आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि “बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019” केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों को अपनी फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी और किसी भी शुल्क वृद्धि से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

तिरहुत प्रमंडल में शुरू हुई यह कार्रवाई अब पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गई है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रशासनिक सख्ती जारी रही तो निजी विद्यालयों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में कई और विद्यालयों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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