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बिहार में 1.19 करोड़ पेंशनधारकों का भुगतान अटका, नए सिस्टम के कारण बढ़ी परेशानी

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बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 1.19 करोड़ लाभुकों की अप्रैल महीने की पेंशन अटक गई है। नए SNA-SPARSH सिस्टम में डाटा इंटीग्रेशन पूरा नहीं होने से भुगतान में देरी हो रही है।

पटना/आलम की खबर: बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना पर निर्भर करोड़ों लोगों के सामने इन दिनों आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। राज्य के करीब 1.19 करोड़ पेंशनधारकों को अप्रैल महीने की पेंशन अब तक नहीं मिल सकी है। हर महीने समय पर मिलने वाली इस राशि में हुई देरी से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के अनुसार भुगतान में आई यह रुकावट केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए एसएनए-स्पर्श सिस्टम की वजह से हुई है।जानकारी के अनुसार पहले सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की राशि केंद्र सरकार से एसएनए सॉफ्टवेयर के जरिए जारी होती थी और उसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाभुकों के बैंक खातों में भुगतान कर दिया जाता था। लेकिन नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से केंद्र सरकार ने सभी सरकारी योजनाओं को एसएनए-स्पर्श सॉफ्टवेयर से जोड़ने का निर्देश जारी किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था में भारत सरकार, राज्य सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को एकीकृत वित्तीय प्रणाली के तहत जोड़ा गया है ताकि भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और केंद्रीकृत बनाया जा सके।

हालांकि नई तकनीकी व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का पूरा डाटा अब तक नए पोर्टल पर पूरी तरह इंटीग्रेट नहीं हो पाया है। इसी कारण अप्रैल महीने की पेंशन राशि लाभुकों के खातों में ट्रांसफर नहीं हो सकी। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र यानी एनआईसी की टीम लगातार डाटा इंटीग्रेशन के काम में लगी हुई है।

अधिकारियों के मुताबिक पेंशनधारकों के नाम, बैंक खाते की जानकारी, आधार डाटा और अन्य जरूरी रिकॉर्ड को एसएनए-स्पर्श प्रणाली में अपडेट किया जा रहा है। यह प्रक्रिया काफी बड़ी है क्योंकि राज्य में करोड़ों लाभुक विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने में अभी कम से कम पांच दिन और लग सकते हैं।

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को हर महीने पेंशन राशि दी जाती है। यह रकम लाखों परिवारों के लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण सहारा होती है। कई बुजुर्ग और गरीब परिवार इसी राशि से दवा, राशन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करते हैं। ऐसे में भुगतान में देरी होने से ग्रामीण इलाकों में काफी चिंता का माहौल देखा जा रहा है।इस बीच समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। राज्यभर में पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि पेंशनधारकों का सत्यापन जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 95.26 लाख लाभुकों का जीवन प्रमाणीकरण पूरा किया जा चुका है।

विभाग का कहना है कि पंचायत स्तर पर लगाए गए इन शिविरों में लाभुकों की सूची उपलब्ध कराई गई है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। शिविरों में प्रखंड स्तरीय अधिकारी, पंचायत कर्मी और कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी के कर्मचारी मौजूद रह रहे हैं। इससे पहले 22 दिसंबर 2025 से राज्य के सभी सीएससी केंद्रों पर नि:शुल्क जीवन प्रमाणीकरण की सुविधा शुरू की गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद शुरुआती तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं, लेकिन इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। विभाग के अनुसार जैसे ही डाटा इंटीग्रेशन का कार्य पूरा होगा, सभी लंबित पेंशन राशि लाभुकों के खातों में एक साथ भेज दी जाएगी।

समाज कल्याण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी लाभुक की पेंशन बंद नहीं की गई है और यह केवल तकनीकी कारणों से हुई अस्थायी देरी है। विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी पात्र लाभुक की राशि रोकी नहीं जाएगी और सभी को उनका भुगतान मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि हर महीने मिलने वाली पेंशन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। कई लोग बैंक और सीएससी केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं ताकि भुगतान की स्थिति की जानकारी मिल सके। कुछ लाभुकों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि मई की शुरुआत तक राशि आ जाएगी, लेकिन अब तक पैसा खाते में नहीं पहुंचा है।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर डिजिटल वित्तीय सिस्टम लागू करने के दौरान शुरुआती समस्याएं आना सामान्य बात है। हालांकि उनका मानना है कि यदि डाटा इंटीग्रेशन सही तरीके से पूरा हो जाता है तो भविष्य में भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी हो सकती है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है कि करोड़ों गरीब लोगों को समय पर पेंशन क्यों नहीं मिल पा रही है। वहीं सरकार का कहना है कि यह केंद्र सरकार द्वारा लागू नई प्रणाली के कारण उत्पन्न तकनीकी समस्या है और इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।

फिलहाल राज्य के लाखों पेंशनधारकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि लंबित राशि कब तक उनके खातों में पहुंचती है। विभागीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद भुगतान शुरू कर दिया जाएगा।

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