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जमुई में देसी शराब बनाने का वीडियो वायरल, शराबबंदी कानून पर उठे सवाल, प्रशासन ने शुरू की छापेमारी

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जमुई में देसी शराब बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। शराबबंदी कानून के उल्लंघन का आरोप लगा है। प्रशासन ने जांच और छापेमारी शुरू कर दी है।

जमुई/आलम की खबर:बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य के कई जिलों से समय-समय पर अवैध शराब निर्माण और बिक्री के मामले सामने आते रहते हैं। ताजा मामला जमुई जिले का है, जहां सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने एक बार फिर शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वायरल वीडियो जमुई के टाउन थाना क्षेत्र अंतर्गत प्रतापपुर इलाके का बताया जा रहा है, जिसमें खुलेआम देसी शराब और महुआ शराब बनाने की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह दिनदहाड़े बिना किसी डर के शराब तैयार की जा रही है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

शराबबंदी कानून और उसका उद्देश्य

बिहार सरकार ने नवंबर 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में नशे की प्रवृत्ति को खत्म करना, परिवारों को आर्थिक और सामाजिक नुकसान से बचाना और सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत करना था। सरकार इस कानून को अपनी बड़ी उपलब्धियों में शामिल करती रही है और लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि राज्य में शराब सेवन पर बड़ी हद तक रोक लगी है।

हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह अलग नजर आती है। ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में अब भी अवैध शराब निर्माण और बिक्री के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि कानून का प्रभाव कितना प्रभावी है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता

जमुई में सामने आए इस वीडियो के बाद स्थानीय प्रशासन और उत्पाद विभाग की चिंता बढ़ गई है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रशासन शराबबंदी कानून के सख्त पालन का दावा करता है, तो फिर खुलेआम शराब निर्माण कैसे जारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ऐसे मामलों में कार्रवाई तो होती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। यही कारण है कि अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीण इलाकों में अब भी जारी है अवैध कारोबार

सूत्रों के अनुसार, जमुई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ से बनी देसी शराब का उत्पादन अब भी छोटे स्तर पर जारी है। कई बार छापेमारी के बाद भी यह धंधा पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता। इसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि यह काम छुपे हुए और छोटे स्तर पर किया जाता है, जिससे निगरानी करना मुश्किल हो जाता है।

कुछ दिन पहले भी इसी तरह का एक वीडियो दोमानपुरा गांव से सामने आया था, जिसमें एक महिला द्वारा शराब बनाते हुए दिखाया गया था। उस मामले में भी प्रशासन ने कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन बड़ी गिरफ्तारी या ठोस परिणाम सामने नहीं आए थे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और कार्रवाई की तैयारी

वायरल वीडियो सामने आने के बाद उत्पाद अधीक्षक सुभाष कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि छापेमारी टीम को संबंधित इलाके में भेजा गया है और जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी हाल में अवैध शराब कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शराबबंदी पर फिर खड़े हुए सवाल

इस घटना ने एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति पर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक तरफ सरकार इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताती है, वहीं दूसरी तरफ लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्रामीण स्तर पर वैकल्पिक रोजगार और जागरूकता नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक अवैध शराब कारोबार पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होगा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

इलाके के लोगों में इस वीडियो के बाद मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे प्रशासन की लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह नियंत्रण तभी संभव है जब लगातार निगरानी और कड़ी कार्रवाई हो।

निष्कर्ष

जमुई में सामने आया यह वायरल वीडियो केवल एक घटना नहीं, बल्कि बिहार की शराबबंदी व्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की एक झलक है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में अवैध शराब कारोबार पर लगाम लग पाती है या नहीं।

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