:
Breaking News

Bihar Heatwave: NHAI का बड़ा फैसला, दोपहर 12 से 3 बजे तक बंद रहेंगे सड़क निर्माण के कई काम

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए NHAI ने बड़ा फैसला लिया है। अब दोपहर 12 से 3 बजे तक कई सड़क निर्माण कार्य बंद रहेंगे। मजदूरों के लिए कूलिंग ब्रेक, ग्लूकोज और टोल कर्मियों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है।

पटना/आलम की खबर:  National Highways Authority of India ने बिहार में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर काम कर रहे मजदूरों, टोलकर्मियों और फील्ड स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई एडवाइजरी जारी की गई है। इसके तहत सड़क निर्माण से जुड़े कई कार्यों के समय में बदलाव किया गया है ताकि दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाओं से कर्मचारियों को बचाया जा सके। बढ़ते तापमान के बीच यह फैसला हजारों मजदूरों और हाईवे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

राज्य में इन दिनों तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। कई जिलों में लू जैसी स्थिति बनी हुई है और दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद अब सरकारी एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। इसी कड़ी में NHAI ने हाईवे निर्माण परियोजनाओं में काम कर रही एजेंसियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि श्रमिकों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए।

नई व्यवस्था के अनुसार दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक सड़क निर्माण से जुड़े कई कार्यों पर रोक रहेगी। विशेष रूप से डामर बिछाने, वेल्डिंग और अत्यधिक गर्मी पैदा करने वाले निर्माण कार्य इस दौरान नहीं कराए जाएंगे। NHAI ने निर्देश दिया है कि ऐसे काम सुबह जल्दी या शाम के समय पूरे किए जाएं, जब तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। अधिकारियों का मानना है कि दोपहर की तेज धूप में काम करने से हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

गर्मी से राहत देने के लिए निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को “कूलिंग ब्रेक” देने का निर्देश दिया गया है। यानी श्रमिकों को बीच-बीच में आराम करने का समय मिलेगा ताकि उनका शरीर अत्यधिक गर्मी से प्रभावित न हो। इसके अलावा सभी निर्माण स्थलों पर ठंडे पेयजल, ग्लूकोज, ओआरएस और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करना अब संवेदकों की जिम्मेदारी होगी। NHAI ने साफ कहा है कि किसी भी परियोजना में श्रमिकों की सेहत की अनदेखी नहीं की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार कई बार मजदूर लगातार धूप में काम करते रहते हैं, जिससे अचानक तबीयत बिगड़ने की घटनाएं सामने आती हैं। इसी को रोकने के लिए अब निर्माण कंपनियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी साइट पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

हीटवेव से निपटने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी तैयारी की गई है। इस प्रशिक्षण में लू लगने के शुरुआती लक्षण, हीटस्ट्रोक की पहचान और आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए फील्ड स्टाफ को प्राथमिक स्तर पर जरूरी चिकित्सीय जानकारी देना बेहद जरूरी है।

टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी अलग व्यवस्था लागू की गई है। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बाहरी संपर्क कम रखने और शिफ्ट रोटेशन प्रणाली अपनाने का निर्देश दिया गया है। इससे कर्मचारियों को लगातार धूप और गर्म हवाओं में खड़े रहने से राहत मिलेगी। कई टोल प्लाजा पर अतिरिक्त पंखे, कूलर और ठंडे पानी की व्यवस्था भी शुरू की जा रही है।

NHAI ने हाईवे पर चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारी की है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर गश्ती एंबुलेंस में अब आइस पैक, ठंडा पानी और IV फ्लूयड्स उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है। इन एंबुलेंसों को हर समय सक्रिय रखा जाएगा ताकि सड़क पर किसी वाहन के खराब होने या किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

इसके अलावा हाईवे किनारे खाली स्थानों पर अस्थायी शेड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इन शेडों का इस्तेमाल मजदूरों और यात्रियों को तेज धूप से राहत देने के लिए किया जाएगा। रूट पेट्रोलिंग यूनिट्स को लगातार सक्रिय रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

NHAI ने सभी परियोजना निदेशकों और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। हर सप्ताह रिपोर्ट तैयार कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण एजेंसियां सभी नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर मजदूरों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती है या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्यों में, जहां गर्मी और लू का असर लगातार बढ़ रहा है, वहां इस तरह के कदम बेहद जरूरी हैं। हर साल गर्मी के कारण कई मजदूर और फील्ड कर्मचारी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में यदि समय रहते सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं तो हीटस्ट्रोक और गर्मी से होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को दोपहर में अनावश्यक बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहा है। डॉक्टरों के अनुसार शरीर में पानी की कमी, लगातार धूप और गर्म हवा के संपर्क में रहने से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप से बचाव करना बेहद जरूरी है।

NHAI का यह फैसला सड़क निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस व्यवस्था से गर्मी के दौरान कार्यस्थलों पर होने वाली स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं में कमी आएगी और श्रमिकों को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *