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Bihar News: स्टाफ नर्सों के मातृत्व अवकाश को लेकर बड़ा फैसला, अब नियुक्ति प्राधिकार देगा मंजूरी

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बिहार स्वास्थ्य विभाग ने स्टाफ नर्सों को बड़ी राहत देते हुए मातृत्व अवकाश मंजूरी की प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब अवकाश स्वीकृति की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को सौंप दी गई है।

पटना/आलम की खबर:  Bihar के स्वास्थ्य विभाग ने परिचारिका संवर्ग की स्टाफ नर्सों को बड़ी राहत देते हुए मातृत्व अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव किया है। विभाग की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार अब स्टाफ नर्सों के मातृत्व अवकाश को मंजूरी देने की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को सौंप दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बदलाव से अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी होगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिया गया यह फैसला राज्यभर में कार्यरत हजारों महिला स्वास्थ्य कर्मियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से मातृत्व अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर कई तरह की प्रशासनिक दिक्कतें सामने आ रही थीं। कई महिला कर्मियों ने समय पर अवकाश स्वीकृत नहीं होने और फाइलों के लंबित रहने की शिकायत की थी। इन समस्याओं को देखते हुए विभाग ने पुराने आदेश की समीक्षा की और अब नई व्यवस्था लागू कर दी है।

दरअसल, दिसंबर 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश जारी कर मातृत्व अवकाश मंजूरी की प्रक्रिया में बदलाव किया था। उस समय सरकार ने जिलों में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने का अधिकार दिया था। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में यह जिम्मेदारी अधीक्षक को और अतिविशिष्ट अस्पतालों में निदेशक को सौंपी गई थी। सरकार का उद्देश्य उस समय प्रक्रिया को केंद्रीकृत बनाकर मामलों का निपटारा तेजी से करना था।

हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई व्यावहारिक परेशानियां सामने आने लगीं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में फाइलें अलग-अलग स्तरों पर लंबित रहने लगीं। तकनीकी आपत्तियों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण महिला कर्मचारियों को समय पर स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी। कई मामलों में अवकाश स्वीकृति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था, जिससे महिला कर्मियों को मानसिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

इन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि केंद्रीकृत व्यवस्था के कारण कार्यभार बढ़ गया था और निर्णय लेने में अनावश्यक देरी हो रही थी। इसके बाद विभाग ने पहले जारी आदेश को वापस लेते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी।

Rekha Jha की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी निर्देश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। साथ ही मातृत्व अवकाश मंजूरी की शक्ति फिर से नियुक्ति प्राधिकार को प्रदान की जाती है। यानी अब वही अधिकारी अवकाश स्वीकृत करेंगे जिनके पास संबंधित स्टाफ नर्स की नियुक्ति से जुड़े प्रशासनिक अधिकार हैं।

अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी और महिला कर्मियों को समय पर राहत मिल सकेगी। पहले जहां फाइलों को कई स्तरों से गुजरना पड़ता था, वहीं अब नियुक्ति प्राधिकार के स्तर पर ही निर्णय लिए जा सकेंगे। इससे अनावश्यक देरी और तकनीकी बाधाओं में कमी आने की उम्मीद है।

राज्यभर में कार्यरत स्टाफ नर्सों और महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मातृत्व अवकाश सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि महिला कर्मचारियों का महत्वपूर्ण अधिकार है। समय पर अवकाश नहीं मिलने से गर्भवती महिला कर्मियों को मानसिक तनाव और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब प्रक्रिया अधिक सहज होने की उम्मीद है।

महिला स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार बढ़ते कार्यभार के बीच मातृत्व अवकाश की स्वीकृति में देरी गंभीर समस्या बन रही थी। कई बार कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मंजूरी मिलने में लंबा समय लग जाता था। अब सीधे नियुक्ति प्राधिकार को अधिकार मिलने से स्थिति में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं और मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों का समय पर समाधान बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में संवेदनशील और त्वरित प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। इसलिए सरकार का यह कदम महिला कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने वाला माना जा रहा है।

जानकारों के अनुसार मातृत्व अवकाश किसी भी महिला कर्मचारी के लिए कानूनी और मानवीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण अधिकार है। यदि इसकी प्रक्रिया जटिल हो जाए तो इसका असर महिला कर्मियों की कार्यक्षमता और मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस नई व्यवस्था के प्रभाव की समीक्षा भी की जाएगी। यदि किसी स्तर पर फिर से कोई समस्या सामने आती है तो उसमें आवश्यक सुधार किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिला स्वास्थ्य कर्मियों को बिना अनावश्यक देरी के उनके अधिकारों का लाभ मिल सके।

बिहार सरकार लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है। हाल के वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ कर्मचारियों से जुड़े मामलों में भी कई सुधार किए गए हैं। मातृत्व अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया में यह बदलाव भी उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल राज्यभर की महिला स्वास्थ्य कर्मियों के बीच इस फैसले को लेकर संतोष का माहौल है। उम्मीद की जा रही है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्टाफ नर्सों को समय पर मातृत्व अवकाश मिलेगा और उन्हें अनावश्यक प्रशासनिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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