:
Breaking News

Bihar EV Policy: बिहार में EV पार्किंग सस्ती होगी, Ola-Uber को 50% इलेक्ट्रिक वाहन रखना होगा

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार सरकार शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई EV नीति लागू करने की तैयारी में है। सस्ती EV पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन और Ola-Uber जैसी कंपनियों के लिए 50% इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य करने की योजना बनाई जा रही है।

पटना/आलम की खबर:  Bihar में अब इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति को तेजी से लागू करने की दिशा में काम कर रही है। बढ़ते प्रदूषण, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की योजना बनाई है। इसके तहत शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सस्ती पार्किंग सुविधा, चार्जिंग स्टेशन का विस्तार और टैक्सी सेवाओं में ई-वाहनों की संख्या बढ़ाने जैसे बड़े फैसले शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में बिहार के प्रमुख शहरों को इलेक्ट्रिक वाहन अनुकूल बनाना है ताकि लोग पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह बैटरी आधारित वाहनों को प्राथमिकता दें। इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग और परिवहन विभाग मिलकर नई व्यवस्थाएं लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।

सरकार के निर्देश के अनुसार अब शहरी इलाकों में निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अनुदानित दर पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए अलग-अलग शहरों में सिटी पार्किंग प्लान तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत सड़क किनारे पार्किंग स्थलों को आधुनिक बनाया जाएगा और वहां चार्जिंग स्टेशन की भी व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि अगर लोगों को पार्किंग के साथ चार्जिंग सुविधा भी आसानी से मिलेगी तो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ेगी।

नई नीति के तहत बड़े भवनों और व्यावसायिक परिसरों में ई-चार्जिंग स्टेशन लगाना भी अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार बहुमंजिला अपार्टमेंट, शॉपिंग मॉल, होटल, बड़े आवासीय परिसर और कमर्शियल बिल्डिंग में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारी में है। इसके लिए भवन निर्माण नियमों में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार नए बिल्डिंग बायलॉज लागू होने के बाद बड़े भवनों को मंजूरी तभी मिल सकेगी जब वहां इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की पर्याप्त व्यवस्था होगी। सरकार का मानना है कि यदि लोगों को घर, ऑफिस, बाजार और पार्किंग स्थल के पास चार्जिंग सुविधा मिलेगी तो ई-वाहनों के इस्तेमाल में तेजी आएगी।

इसके अलावा पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन संचालकों के लिए भी नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। परिवहन विभाग चाहता है कि आने वाले समय में हर बड़े पेट्रोल पंप पर कम से कम एक ई-चार्जिंग स्टेशन जरूर हो। नए पेट्रोल पंपों को लाइसेंस जारी करते समय चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि पुराने पंप संचालकों को भी धीरे-धीरे इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

सरकार बड़े होटल, मोटल और हाईवे किनारे स्थित ठहराव केंद्रों को भी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रेरित कर रही है। इसके लिए प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं देने पर विचार किया जा रहा है ताकि निजी निवेशक भी इस क्षेत्र में तेजी से निवेश करें। माना जा रहा है कि इससे राज्य में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार होगा और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी।

इधर परिवहन विभाग ने Ola, Uber और Rapido जैसी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए भी बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार की नई योजना के तहत इन कंपनियों को अगले चार वर्षों में अपने बेड़े का 50 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा।

नई व्यवस्था के अनुसार शुरुआती दो वर्षों में कम से कम 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन शामिल करना अनिवार्य होगा। इसके बाद तीसरे वर्ष तक यह संख्या बढ़ाकर 40 प्रतिशत करनी होगी, जबकि चौथे वर्ष के अंत तक आधे वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए। इसमें दोपहिया और चारपहिया दोनों तरह के वाहन शामिल होंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित लक्ष्य का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम प्रदूषण कम करने और हरित परिवहन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू होने से आने वाले वर्षों में ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न सिर्फ ईंधन पर खर्च कम होगा बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। साथ ही चार्जिंग स्टेशन, बैटरी सर्विस और ई-वाहन मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

हाल के वर्षों में देश के कई बड़े राज्यों ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की है और अब बिहार भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में बिहार में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार के शहरों में लगातार बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण को देखते हुए ई-वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है। यदि सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में सफल रहती है तो लोग धीरे-धीरे पारंपरिक वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

सरकार का दावा है कि नई नीति लागू होने के बाद राज्य में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित होगी। इससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा और लोगों को लंबे समय में आर्थिक लाभ भी मिलेगा।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *