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मगध यूनिवर्सिटी में 200 करोड़ घोटाले का आरोप: पूर्व सांसद ने PM मोदी से की निष्पक्ष जांच की मांग

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मगध यूनिवर्सिटी में 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। कार्यवाहक VC पर अवैध निकासी, भ्रष्टाचार और अवैध नियुक्तियों के आरोप लगाए गए हैं।

पटना/आलम की खबर:Magadh University एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के कारण सुर्खियों में आ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूर्व सांसद Sushil Kumar Singh ने सीधे प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने बिहार के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

पूर्व सांसद ने अपने पत्र में कार्यवाहक कुलपति प्रो. Shashi Pratap Shahi पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है। आरोप है कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय फंड से करीब 150 से 200 करोड़ रुपये तक की अवैध निकासी की गई।

प्रधानमंत्री को भेजा गया शिकायत पत्र

जानकारी के अनुसार पूर्व सांसद द्वारा भेजे गए पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, राज्यपाल सचिवालय, लोक शिकायत कार्यालय पटना और बिहार निगरानी विभाग को भी भेजी गई हैं। पत्र में उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए और जांच पूरी होने तक कार्यवाहक कुलपति को तत्काल पद से हटाया जाए।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार, अवैध नियुक्तियों और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर पहले भी कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्र के साथ राज्यपाल सचिवालय में दस्तावेज जमा किए हैं।

हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका मामला

पूर्व सांसद ने अपने आरोपों में यह भी कहा कि इस पूरे मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि अगर जांच आगे बढ़ती है तो विश्वविद्यालय प्रशासन और कई अन्य स्तरों पर भी सवाल उठ सकते हैं।

राज्यपाल सचिवालय की भूमिका पर सवाल

पत्र में सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन ही नहीं बल्कि राज्यपाल सचिवालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। पूर्व सांसद का आरोप है कि जिन अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए, वही शिकायतों को दोबारा जांच के लिए आरोपित अधिकारियों के पास भेज रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इससे शिकायतकर्ताओं को न्याय नहीं मिल पा रहा और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ताओं को “मैनेज” करने की कोशिश की जा रही है।

अवैध नियुक्तियों और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप

पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि कई नियुक्तियां नियमों को दरकिनार कर की गईं और विश्वविद्यालय के संसाधनों का गलत इस्तेमाल हुआ।

हालांकि इन आरोपों को लेकर अभी तक किसी जांच एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी

अब तक कार्यवाहक कुलपति या विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय की ओर से सफाई या प्रतिक्रिया जारी की जा सकती है।

शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप गंभीर हैं तो निष्पक्ष जांच जरूरी है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे राजनीतिक विवाद के रूप में भी देख रहे हैं।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

पूर्व सांसद द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा सकते हैं। वहीं सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

छात्र संगठनों और शिक्षकों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

मगध विश्वविद्यालय बिहार के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक माना जाता है। ऐसे में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालयों का ध्यान शिक्षा और शोध पर होना चाहिए, लेकिन लगातार विवादों से संस्थानों की छवि प्रभावित हो रही है।

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