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दानापुर रेल मंडल कार्यालय में बवाल! अधिकारी और कर्मचारी के बीच विवाद मारपीट तक पहुंचा

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दानापुर रेल मंडल कार्यालय में निविदा विवाद को लेकर अधिकारी और कर्मचारी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने खगौल थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

पटना/आलम की खबर: East Central Railway के दानापुर रेल मंडल कार्यालय में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी के बीच विवाद का मामला कथित तौर पर मारपीट तक पहुंच गया। घटना के बाद रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया और पूरे मंडल कार्यालय में इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों को पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ा। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।

बताया जा रहा है कि विवाद संकेत एवं दूरसंचार विभाग यानी एसएंडटी शाखा से जुड़ा है। आरोप है कि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी और कार्यालय अधीक्षक के बीच निविदा से संबंधित एक मामले को लेकर तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि मामला कथित हाथापाई तक पहुंच गया। घटना के बाद कार्यालय परिसर में मौजूद रेलकर्मियों के बीच सनसनी फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय कार्यालय के अंदर अचानक शोर-शराबा सुनाई दिया। कुछ देर बाद कार्यालय अधीक्षक प्रणय कुमार कथित रूप से फटे कपड़ों और बदहवास स्थिति में अधिकारी के कक्ष से बाहर निकले। उन्हें इस हालत में देखकर वहां मौजूद कर्मचारी हैरान रह गए। इसके बाद कार्यालय परिसर में भीड़ जुट गई और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

कार्यालय अधीक्षक प्रणय कुमार ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी रंजीत कुमार भास्कर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की। उनका कहना है कि यह सब एक संवेदक की मौजूदगी में हुआ, जिससे उन्हें मानसिक रूप से भी काफी ठेस पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।

सूत्रों के मुताबिक पूरा मामला निविदा से जुड़े वेरियेशन को लेकर पूछताछ के दौरान शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि अधिकारी ने कार्यालय अधीक्षक को अपने कक्ष में बुलाया था। उसी दौरान संवेदक भी वहां मौजूद थे। बातचीत के दौरान किसी प्रशासनिक प्रक्रिया और दस्तावेज को लेकर सवाल-जवाब शुरू हुआ। इसी क्रम में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ती चली गई। बाद में माहौल इतना गरमा गया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

रेलवे कर्मचारियों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभागीय तनाव और कार्य का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति बन जाती है। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

घटना को लेकर सबसे अधिक चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कार्यालय अधीक्षक प्रणय कुमार अगले दो महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे समय में उनके साथ इस तरह की घटना ने पूरे रेल मंडल में हलचल पैदा कर दी है। कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि मामला बहस से बढ़कर कथित मारपीट तक पहुंच गया।

रेलवे कार्यालय के अंदर हुई इस घटना ने विभागीय अनुशासन और कार्यसंस्कृति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी के बीच संवाद बेहतर तरीके से होता तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता। कई रेलकर्मियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

घटना के बाद दोनों पक्ष कानूनी सलाह लेने में जुट गए। बाद में दोनों ने खगौल थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों पक्षों के आवेदन स्वीकार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। खगौल थाना पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार सबसे पहले अधिकारी रंजीत कुमार भास्कर की ओर से आवेदन दिया गया। इसके बाद कार्यालय अधीक्षक प्रणय कुमार ने भी अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान, कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों की जानकारी और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।

इधर, रेलवे प्रशासन की ओर से मंगलवार दोपहर तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कर्मचारियों के बीच यह उम्मीद की जा रही है कि मंडल प्रशासन जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करेगा।

रेलवे महकमे में इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई कर्मचारी इसे विभागीय तनाव और प्रशासनिक दबाव का परिणाम मान रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में बढ़ती संवेदनहीनता और संवाद की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच और रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

यदि जांच में मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर यदि मामला केवल आपसी विवाद का निकला तो प्रशासन दोनों पक्षों के बीच समझौते का रास्ता भी तलाश सकता है। फिलहाल पूरे मामले ने दानापुर रेल मंडल कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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