:
Breaking News

दो महीने बाद मिलीं करोड़ों की राम-जानकी की प्राचीन मूर्तियां, मसौढ़ी में खुशी और भक्ति का माहौल

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना के मसौढ़ी स्थित छाता गांव से चोरी हुई करीब 200 साल पुरानी अष्टधातु की राम, जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियां दो महीने बाद बरामद हुई हैं। सड़क किनारे मिली मूर्तियों को देखने ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

पटना/आलम की खबर: पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके में खुशी और आस्था का माहौल पैदा कर दिया। करीब दो महीने पहले चोरी हुई अष्टधातु की भगवान श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण की प्राचीन मूर्तियां आखिरकार बरामद हो गई हैं। सोमवार सुबह थाना क्षेत्र के शाहाबाद-लखनौर सीमा के पास सड़क किनारे इन मूर्तियों के मिलने की सूचना जैसे ही फैली, आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे। वर्षों पुरानी आस्था से जुड़ी इन मूर्तियों की वापसी को ग्रामीण किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ये मूर्तियां मसौढ़ी थाना क्षेत्र के छाता गांव स्थित कल्लू ठाकुरबाड़ी मंदिर से करीब दो महीने पहले चोरी हो गई थीं। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। ग्रामीणों और मंदिर समिति ने प्रशासन से मूर्तियों की जल्द बरामदगी की मांग की थी। अब जब चोरी हुई मूर्तियां फिर से मिल गई हैं तो गांव में धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंच गया है।

सोमवार सुबह कुछ ग्रामीणों ने शाहाबाद-लखनौर सीमा के पास सड़क किनारे संदिग्ध स्थिति में मूर्तियां रखी देखीं। पास जाकर देखने पर पता चला कि ये वही अष्टधातु की मूर्तियां हैं जो मार्च महीने में चोरी हुई थीं। सूचना मिलते ही देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने मूर्तियों को सम्मानपूर्वक सड़क किनारे से उठाकर एक पेड़ के पास बने चबूतरे पर स्थापित किया, जिसके बाद वहां पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन शुरू हो गया।

गांव में धार्मिक माहौल इतना बढ़ गया कि डीजे पर भक्ति गीत बजने लगे और महिलाएं, बुजुर्ग व बच्चे बड़ी संख्या में मूर्तियों के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। कई ग्रामीणों की आंखों में खुशी के आंसू भी दिखाई दिए। लोगों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि भगवान की मूर्तियां एक दिन जरूर वापस आएंगी।

गौरतलब है कि बीते 16 मार्च की देर रात बदमाशों ने कल्लू ठाकुरबाड़ी मंदिर का दरवाजा तोड़कर भगवान श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण की अष्टधातु की मूर्तियां चोरी कर ली थीं। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। मंदिर समिति के अनुसार ये मूर्तियां अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ थीं। बताया जाता है कि इनकी स्थापना वर्ष 1935 में मंदिर में की गई थी, जबकि मूर्तियां करीब 200 वर्ष पुरानी मानी जाती हैं।

मंदिर समिति के सदस्यों का दावा है कि चोरी हुई मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सात से आठ करोड़ रुपये तक हो सकती है। सभी मूर्तियों पर चांदी का मुकुट भी लगा हुआ था। यही कारण था कि चोरी की घटना के बाद पुलिस पर लगातार दबाव बना हुआ था और प्रशासन भी मामले को गंभीरता से ले रहा था।

मूर्ति चोरी के बाद ठाकुरबाड़ी समिति के सचिव मुनीदेव सिंह ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। टावर डंप, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर लगातार छापेमारी की जा रही थी। पुलिस की सक्रियता और बढ़ते दबाव के कारण आरोपितों में गिरफ्तारी का भय बढ़ता जा रहा था।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी दबाव के कारण चोरों ने आखिरकार मूर्तियों को सड़क किनारे छोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सोमवार सुबह एक बाइक पर कुछ लोग आए और मूर्तियां सड़क किनारे रखकर तेजी से वहां से निकल गए। हालांकि पुलिस अब इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही मसौढ़ी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। थानाध्यक्ष विवेक भारती ने स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से बातचीत की। पुलिस ने फिलहाल मूर्तियों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ठाकुरबाड़ी समिति को जिम्मेनामा पर सौंप दिया है। साथ ही न्यायालय से रिलीज की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

मंदिर समिति ने कहा है कि मूर्तियों की दोबारा मंदिर में स्थापना विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठान के साथ की जाएगी। इसके लिए समिति की बैठक बुलाई जाएगी और शुभ तिथि तय कर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि मूर्तियों की पुनः स्थापना गांव के लिए किसी बड़े धार्मिक उत्सव से कम नहीं होगी।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार में प्राचीन मंदिरों और धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी अष्टधातु की मूर्तियां अंतरराष्ट्रीय तस्करों के निशाने पर रहती हैं। कई बार ऐसी मूर्तियां चोरी कर विदेशों में बेचने की कोशिश की जाती है। इसलिए ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली मूर्तियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम जरूरी हैं।

ग्रामीणों ने पुलिस की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि लगातार दबाव और जांच के कारण ही चोर मूर्तियों को वापस छोड़ने पर मजबूर हुए। हालांकि लोग यह भी चाहते हैं कि इस मामले में शामिल आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

फिलहाल छाता गांव में खुशी, आस्था और उत्साह का माहौल है। लोग इसे भगवान की कृपा और ग्रामीणों की एकजुटता का परिणाम मान रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का दौर जारी है।

यह भी पढ़ें:

दानापुर रेल मंडल कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारी विवाद से मचा हड़कंप

पीएमसीएच में मरीजों से बाहर से दवा खरीदवाने का आरोप

बिहार में बढ़ती गर्मी को लेकर मौसम विभाग का नया अलर्ट

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *