:
Breaking News

भागलपुर में गंगा के बीच बंद हुई यात्रियों से भरी नाव, 75 लोगों की जान पर बन आई

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

भागलपुर में गंगा नदी के बीच यात्रियों से भरी नाव का इंजन अचानक बंद हो गया। नाव पर 75 यात्री और 13 बाइक सवार थीं। SDRF ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

भागलपुर/आलम की खबर: बिहार के Bhagalpur में गंगा नदी के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई जब यात्रियों से भरी एक नाव अचानक तकनीकी खराबी का शिकार होकर बीच धारा में रुक गई। नाव पर करीब 75 यात्री सवार थे, जबकि 13 मोटरसाइकिलें भी लदी हुई थीं। घटना के बाद नाव पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई और कुछ देर के लिए हालात बेहद डरावने हो गए। हालांकि समय रहते SDRF और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार यह नाव महादेवपुर गंगा घाट से बरारी गंगा घाट की ओर जा रही थी। रोज की तरह बड़ी संख्या में यात्री नदी पार करने के लिए नाव पर सवार हुए थे। नाव पर यात्रियों के साथ बाइक भी लदी हुई थीं। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन बीच गंगा में पहुंचते ही अचानक इंजन ने काम करना बंद कर दिया। इंजन फेल होते ही नाव धारा के बीच रुक गई और धीरे-धीरे असंतुलित होने लगी। यह दृश्य देखकर यात्रियों में दहशत फैल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव के रुकते ही कई लोग घबरा गए। महिलाएं और बच्चे रोने लगे जबकि कुछ यात्री मोबाइल फोन से अपने परिजनों को सूचना देने लगे। कई लोग मदद के लिए जोर-जोर से आवाज लगाने लगे। गंगा की तेज धारा और नाव की स्थिति को देखकर यात्रियों को किसी बड़े हादसे का डर सताने लगा था।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आसपास चल रही दूसरी नाव में भी तकनीकी खराबी आने की सूचना मिली। लगातार दो नावों में आई खराबी ने नदी परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से नावों की तकनीकी जांच ठीक से नहीं की जा रही, जिसके कारण यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। सूचना SDRF टीम तक पहुंचाई गई जिसके बाद तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। बचाव दल मोटरबोट के जरिए मौके पर पहुंचा और नाव में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। SDRF जवानों ने पहले महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित किनारे पहुंचाया, इसके बाद अन्य यात्रियों को बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नाव पर लदी 13 मोटरसाइकिलों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कई यात्रियों ने बताया कि कुछ मिनटों के लिए उन्हें लगा था कि शायद वे सुरक्षित किनारे तक नहीं पहुंच पाएंगे।

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले चार दिनों में यह तीसरी घटना है जब गंगा नदी में नाव बीच धारा में खराब हुई है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब लोगों में डर का माहौल बनने लगा है। रोजाना हजारों लोग गंगा पार करने के लिए नावों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में तकनीकी खराबी और सुरक्षा इंतजामों की कमी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

ग्रामीणों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी नावों की नियमित तकनीकी जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि कई नावें पुरानी हो चुकी हैं और उनकी हालत खराब है, फिर भी उन्हें यात्रियों से भरकर नदी में उतार दिया जाता है। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षमता से अधिक लोगों और सामान को नावों पर लादा जाता है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदी परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। नावों में लाइफ जैकेट, आपातकालीन उपकरण और नियमित तकनीकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए। लेकिन कई घाटों पर इन नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जाता। यही कारण है कि छोटी तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।

घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन नावों में खराबी आई है उनकी तकनीकी स्थिति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह भी जांच होगी कि नाव संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भागलपुर में गंगा नदी के जरिए होने वाला आवागमन बड़ी संख्या में लोगों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा है। खासकर ग्रामीण इलाकों के लोग समय बचाने के लिए नावों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन केवल जांच तक सीमित न रहे बल्कि स्थायी समाधान निकाले ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

घटना के बाद घाटों पर भी काफी देर तक लोगों की भीड़ लगी रही। सुरक्षित बाहर निकाले गए यात्रियों ने SDRF और प्रशासन की तत्परता की सराहना की। हालांकि उनके चेहरे पर हादसे का डर साफ दिखाई दे रहा था। कई यात्रियों ने कहा कि अब वे नाव पर सफर करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था जरूर देखेंगे।

फिलहाल राहत की बात यही रही कि समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया गया और सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर बिहार में नदी परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह भी पढ़ें:

सोनपुर में बनेगा गंगा अंबिका पथ और हरिहरनाथ कॉरिडोर

बिहार में ‘सहयोग शिविर’ के जरिए 30 दिन में शिकायत निपटाने की व्यवस्था

मसौढ़ी में दो महीने बाद मिलीं करोड़ों की प्राचीन राम-जानकी मूर्तियां

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *