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जून तक पूरा होगा भारत-नेपाल सीमा सड़क प्रोजेक्ट, बिहार के सात जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा

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भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना जून तक पूरी होने की तैयारी में है। 554 किलोमीटर लंबी इस सड़क से बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क मजबूत होगा और सीमा सुरक्षा को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।

पटना/आलम की खबर:भारत-नेपाल सीमा पर बन रही महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार की संयुक्त पहल से तैयार की जा रही यह सीमा सड़क जून महीने तक पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। करीब 554 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना का अधिकांश हिस्सा तैयार हो चुका है और अब केवल 16 किलोमीटर सड़क निर्माण का काम बाकी बचा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शेष हिस्से पर तेजी से काम किया जा रहा है और अगले महीने तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह सड़क परियोजना बिहार के सीमावर्ती इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सड़क बिहार के सात जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरती है। इन जिलों में वर्षों से बेहतर सड़क संपर्क और सीमा सुरक्षा को लेकर मांग उठती रही है। अब इस परियोजना के पूरा होने से न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार अब तक करीब 538 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है। पूर्वी चंपारण में लगभग 11 किलोमीटर और किशनगंज में करीब पांच किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य शेष है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों जिलों में युद्धस्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है और मानसून शुरू होने से पहले पूरी परियोजना को तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना को सामरिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है। बिहार की नेपाल सीमा करीब 650 किलोमीटर लंबी है। इसमें से 554 किलोमीटर सड़क विशेष सीमा सड़क परियोजना के तहत बनाई जा रही है, जबकि बाकी हिस्सा पहले से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। सड़क बनने के बाद सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की गश्त और निगरानी पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि सीमा से सटे इलाकों में कई बार खराब सड़क और कनेक्टिविटी की वजह से सुरक्षा एजेंसियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। बरसात के मौसम में हालात और ज्यादा कठिन हो जाते थे। लेकिन नई सड़क तैयार होने के बाद सीमा पर त्वरित कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। सड़क की चौड़ाई लगभग सात मीटर रखी गई है ताकि बड़े वाहनों और सुरक्षा बलों की आवाजाही में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।

इस परियोजना का फायदा सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर सीमावर्ती जिलों की अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ेगा। सड़क बनने से बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क और मजबूत होगा। व्यापार, परिवहन और पर्यटन गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ माना जाता है। सीमावर्ती जिलों में सड़क निर्माण से स्थानीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी और किसानों व व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों में पर्यटन और छोटे व्यवसायों को नई गति मिलने की संभावना है।

इस परियोजना पर केंद्र सरकार ने करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं बिहार सरकार ने भूमि अधिग्रहण और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लगभग 2800 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की है। इतनी बड़ी लागत वाली इस परियोजना को बिहार की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने से सीमावर्ती गांवों की तस्वीर बदल जाएगी। अभी कई इलाकों में लोगों को खराब सड़क के कारण अस्पताल, बाजार और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। लेकिन नई सड़क शुरू होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

इधर भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण को लेकर भी काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार पुल पर सीमित आवाजाही जल्द शुरू की जा सकती है ताकि लोगों को राहत मिल सके। सरकार कोशिश कर रही है कि बिहार के प्रमुख सड़क और पुल परियोजनाओं को जल्द पूरा कर परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।

भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों को समय पर निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि सड़क पूरी होने के बाद सीमा क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर देखने को मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह सड़क सिर्फ एक परिवहन मार्ग नहीं बल्कि बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई पहचान बनेगी। सड़क के जरिए सुरक्षा, व्यापार और पर्यटन तीनों क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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