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इबोला वायरस को लेकर बिहार में हाई अलर्ट, अस्पतालों में शुरू हुई विशेष तैयारी

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अफ्रीकी देशों में फैल रहे इबोला वायरस को लेकर बिहार सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जबकि पटना के बड़े अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और विशेष इलाज की तैयारी शुरू कर दी गई है।

पटना/आलम की खबर:अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। राज्य में संभावित संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। राजधानी पटना समेत सभी जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित राज्य स्वास्थ्य समिति में शुक्रवार को इबोला संक्रमण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें संक्रमण की स्थिति, रोकथाम के उपाय और अस्पतालों की तैयारी पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद राज्य के सभी 38 जिलों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने खासतौर पर उन लोगों की निगरानी बढ़ाने को कहा है, जो हाल के दिनों में अफ्रीकी देशों से बिहार लौटे हैं या उनके संपर्क में आए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध मरीजों की तुरंत स्वास्थ्य जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें अलग निगरानी में रखा जाए। स्वास्थ्य विभाग ने इबोला संक्रमण से निपटने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी भी तैयार कर ली है, जिसे सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भेजा जा रहा है।

एसओपी के तहत यदि किसी व्यक्ति में इबोला जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत आइसोलेट किया जाएगा। मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री की जांच की जाएगी और उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी भी मेडिकल स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही बुखार, उल्टी, दस्त और संक्रमण से जुड़ी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

इबोला वायरस दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, मल या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में मृत्यु दर काफी अधिक होती है, इसलिए शुरुआती स्तर पर पहचान और आइसोलेशन बेहद जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि बिहार सरकार किसी भी संभावित खतरे को लेकर पहले से तैयारी करने में जुट गई है।

जानकारी के अनुसार दक्षिण अफ्रीका, सूडान, दक्षिण सूडान और अन्य अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में बिहारी मूल के लोग रहते हैं। अनुमान है कि करीब 70 हजार से अधिक बिहार के लोग विभिन्न अफ्रीकी देशों में कामकाज या व्यापार से जुड़े हुए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भोजपुरी भाषी समुदाय की बताई जा रही है। यही कारण है कि राज्य सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है, ताकि विदेश से लौटने वाले यात्रियों के माध्यम से संक्रमण फैलने की आशंका को रोका जा सके।

राजधानी पटना के प्रमुख अस्पतालों में भी तैयारी तेज कर दी गई है। पीएमसीएच में इबोला संक्रमित संदिग्ध मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बिहार में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी की जा रही है।

वहीं आईजीआईएमएस सहित अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जैसे ही विस्तृत गाइडलाइन जारी होगी, उसी के अनुसार आइसोलेशन वार्ड, मेडिकल टीम और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। डॉक्टरों को भी संक्रमण से बचाव को लेकर विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण या फ्लू जैसे दिखाई देते हैं, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल हो सकती है। मरीज को अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। संक्रमण बढ़ने पर उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के विभिन्न हिस्सों से खून निकलने जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। यदि किसी व्यक्ति की हाल में अफ्रीकी देशों की यात्रा रही हो और उसमें संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।

कोरोना महामारी के बाद बिहार सरकार स्वास्थ्य ढांचे को लेकर पहले से अधिक सतर्क नजर आ रही है। यही वजह है कि इबोला जैसे संभावित खतरनाक संक्रमण को लेकर पहले से तैयारी शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार केंद्र सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संपर्क में बना हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर जारी एडवाइजरी के अनुसार कदम उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल बिहार में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का दावा कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि समय रहते निगरानी और इलाज की व्यवस्था मजबूत कर संक्रमण के खतरे को रोका जा सके। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से और भी दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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