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समस्तीपुर में बिजली बिलिंग और मीटरिंग व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल और एआई आधारित, उपभोक्ताओं को मिलेगी बड़ी राहत

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समस्तीपुर में बिजली बिलिंग और मीटरिंग व्यवस्था को डिजिटल और एआई आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नए रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम से पारदर्शिता और उपभोक्ता सेवाएं बेहतर होंगी।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव शुरू होने जा रहा है। बिजली बिलिंग और मीटरिंग व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बनाने की दिशा में तैयारी तेज कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बिजली बिलिंग प्रणाली अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक हो जाएगी तथा उपभोक्ताओं को सेवाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक तरीके से मिल सकेगा।

North Bihar Power Distribution Company Limited (NBPDCL) द्वारा यह कदम बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में कई चरणों में सफल परीक्षण के बाद अब समस्तीपुर सहित शहरी इलाकों में नए रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत पूरा बिलिंग और मीटरिंग नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है।

नई प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एआई आधारित एनालिटिक्स तकनीक का उपयोग है। इस तकनीक की मदद से बिजली की खपत का विश्लेषण रियल टाइम में किया जा सकेगा और मीटर रीडिंग में होने वाली मानवीय त्रुटियों को लगभग समाप्त किया जा सकेगा। इसके अलावा बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को उनके वास्तविक उपयोग के आधार पर सटीक बिल प्राप्त होगा। विभाग का दावा है कि इस तकनीक के लागू होने से राजस्व प्रबंधन भी अधिक मजबूत और व्यवस्थित होगा।

सूत्रों के अनुसार इस पूरी व्यवस्था के लिए मुख्यालय स्तर पर सॉफ्टवेयर माइग्रेशन का कार्य तेजी से चल रहा है। पुराने सिस्टम को हटाकर एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसमें उपभोक्ता से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। इसमें बिल जनरेशन, मीटर रीडिंग, भुगतान ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

हालांकि इस तकनीकी बदलाव के दौरान कुछ सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित भी हो रही हैं। शहरी क्षेत्रों में फिलहाल बिलिंग, बिल सुधार, लोड परिवर्तन और नए बिजली कनेक्शन जैसी ऑनलाइन सेवाओं पर आंशिक असर देखा जा सकता है। लेकिन स्मार्ट मीटर रिचार्ज और बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहले की तरह निर्बाध रूप से जारी रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, सभी सेवाएं सामान्य गति से काम करने लगेंगी।

उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कंपनी जल्द ही अपने मोबाइल एप्लिकेशन ‘सुविधा ऐप’ का नया और उन्नत संस्करण लॉन्च करने जा रही है। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता घर बैठे कई महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। इनमें नया बिजली कनेक्शन आवेदन, लोड परिवर्तन, मोबाइल नंबर अपडेट, स्मार्ट मीटर रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ताओं को विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव केवल तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि पूरी सेवा प्रणाली को उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। डिजिटल और एआई आधारित सिस्टम लागू होने के बाद बिजली चोरी पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और लोड मैनेजमेंट अधिक प्रभावी होगा।

स्थानीय उपभोक्ताओं के बीच इस नई व्यवस्था को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ लोग इसे आधुनिक और सुविधाजनक कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ उपभोक्ता संक्रमण अवधि के दौरान आने वाली परेशानियों को लेकर चिंतित हैं। हालांकि विभाग ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी उपभोक्ता को असुविधा नहीं होने दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में बिजली वितरण प्रणाली को डिजिटल और एआई आधारित बनाना एक दूरगामी और सकारात्मक कदम है। इससे न केवल राजस्व में सुधार होगा बल्कि उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था पूरे राज्य के लिए मॉडल सिस्टम के रूप में भी विकसित हो सकती है।

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समस्तीपुर में बिजली बिलिंग और मीटरिंग प्रणाली को डिजिटल और एआई आधारित बनाने का निर्णय तकनीकी दृष्टि से एक बड़ा कदम माना जा सकता है। आज के समय में जब हर क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में बिजली वितरण प्रणाली का आधुनिक होना न केवल आवश्यक है बल्कि अनिवार्य भी है।

एआई आधारित बिलिंग प्रणाली से सबसे बड़ा लाभ पारदर्शिता में होगा। अक्सर उपभोक्ताओं को गलत बिलिंग या मीटर रीडिंग की शिकायत रहती है, जिसे नई प्रणाली काफी हद तक समाप्त कर सकती है। साथ ही विभागीय कार्यों में भी तेजी आएगी और मानव त्रुटियों की संभावना कम होगी।

हालांकि किसी भी बड़े तकनीकी बदलाव की तरह इसमें शुरुआती चुनौतियां भी होंगी। सॉफ्टवेयर माइग्रेशन के दौरान सेवाओं का प्रभावित होना स्वाभाविक है, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था उपभोक्ताओं और विभाग दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।

यदि इस प्रणाली को सही तरीके से लागू किया जाता है, तो यह बिहार के बिजली प्रबंधन के लिए एक मॉडल बन सकती है और अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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