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बिहार टेंडर स्कैम में रिशु श्री से 33 घंटे पूछताछ, अब फरार IAS अधिकारियों पर जांच एजेंसी की नजर

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बिहार के चर्चित टेंडर हेराफेरी मामले में कारोबारी रिशु श्री से पांच दिनों तक पूछताछ पूरी हो गई है। SVU ने 33 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। अब फरार IAS अधिकारियों को नोटिस देने की तैयारी है।

पटना/आलम की खबर:बिहार के बहुचर्चित टेंडर हेराफेरी मामले में जांच की गति लगातार तेज होती जा रही है। इस मामले में गिरफ्तार कारोबारी रिशु श्री से पांच दिनों तक चली रिमांड अवधि पूरी हो गई है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने रिमांड के दौरान उससे टेंडर प्रक्रिया, सरकारी विभागों में हुए काम, अधिकारियों से संपर्क और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। जांच के दौरान तीन अलग-अलग टीमों ने बारी-बारी से रिशु श्री से पूछताछ की और करीब 33 घंटे से अधिक समय तक उससे जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।

रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार रात रिशु श्री को दोबारा जेल भेज दिया गया। हालांकि पूछताछ के दौरान उसने जांच अधिकारियों के सामने कई बातों को स्वीकार किया, लेकिन कई अहम सवालों पर वह स्पष्ट जवाब देने से बचता रहा। सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री ने पूछताछ में बेहद सावधानी से जवाब दिए और अपने वकील की सलाह के अनुसार ही अपना पक्ष रखा।

जांच एजेंसी के सामने रिशु श्री ने अधिकारियों से संपर्क होने की बात को पूरी तरह नकारा नहीं, लेकिन उसने इसे व्यावसायिक संबंध बताया। उसका कहना था कि उसकी कंपनी सरकारी विभागों के साथ काम करती थी और टेंडर से जुड़े कार्यों के कारण अधिकारियों से मिलना उसके व्यापार का सामान्य हिस्सा था। उसने किसी भी अधिकारी को टेंडर दिलाने या किसी विशेष काम के बदले पैसे देने की बात स्वीकार नहीं की।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जब एसवीयू अधिकारियों ने टेंडर हासिल करने, पोस्टिंग से जुड़े कथित मामलों और आर्थिक लेन-देन को लेकर सवाल किए तो रिशु श्री ने कहा कि सरकारी व्यवस्था में काम कराने के लिए संपर्क और बातचीत जरूरी होती है। हालांकि उसने किसी विशेष व्यक्ति को भुगतान करने या किसी अवैध लेन-देन की पुष्टि नहीं की। जांच एजेंसी अब उसके बयानों की जांच दस्तावेजों और अन्य सबूतों के आधार पर कर रही है।

एसवीयू ने पूछताछ के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जुड़े कई बिंदुओं पर भी जानकारी लेने की कोशिश की। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। रिशु श्री से जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, भवन निर्माण विभाग और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) से जुड़े टेंडरों के संबंध में विशेष रूप से सवाल किए गए।

जांच एजेंसी का मानना है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े टेंडरों में यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने लाना जरूरी है। इसी कारण रिशु श्री से लंबे समय तक पूछताछ की गई और उससे मिली जानकारी का अन्य सबूतों से मिलान किया जा रहा है।

अब जांच एजेंसी की नजर उन IAS अधिकारियों पर है, जो छापेमारी के दौरान मौजूद नहीं मिले थे। सूत्रों के अनुसार, फरार IAS अधिकारी संजीव हंस, योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को जल्द ही जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। एसवीयू इन अधिकारियों से छापेमारी में बरामद दस्तावेजों, रिशु श्री से कथित संबंधों और टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांग सकती है।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सरकारी पदों पर रहते हुए किसी अधिकारी ने निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की। अधिकारियों से पूछताछ के बाद ही मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की संभावना है।

इस मामले में रिशु श्री के करीबी सहयोगियों की भूमिका की भी जांच जारी है। जांच एजेंसी मातृस्वा इंफ्रा कंपनी के निदेशक पवन कुमार की तलाश कर रही है। इसके अलावा जेल में बंद अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इनमें रिशु श्री के सहयोगी संतोष और गिरफ्तार अधिकारी तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी तथा उमेश कुमार सिंह शामिल हैं।

एसवीयू आने वाले दिनों में इन सभी आरोपियों से पूछताछ कर मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करेगी। जांच एजेंसी का मानना है कि सभी संबंधित लोगों के बयान और दस्तावेजों की जांच के बाद ही टेंडर हेराफेरी मामले की पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।

बिहार टेंडर स्कैम मामले में फिलहाल जांच कई स्तरों पर चल रही है। कारोबारी रिशु श्री से पूछताछ पूरी होने के बाद अब जांच का फोकस सरकारी अधिकारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका पर केंद्रित हो गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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बिहार टेंडर हेराफेरी मामला सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं के लिए जारी होने वाले टेंडर में निष्पक्ष प्रक्रिया बेहद जरूरी होती है, क्योंकि इससे सीधे जनता के हित जुड़े होते हैं।

इस मामले में जांच एजेंसी लगातार सबूत जुटाने और सभी संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में लगी है। रिशु श्री से लंबी पूछताछ के बाद अब अधिकारियों से जवाब मांगने की तैयारी बताती है कि जांच का दायरा बढ़ रहा है।

हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन जरूरी है कि दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई हो और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता मजबूत हो।

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