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मोतिहारी कबीर अंत्येष्टि योजना घोटाला: कागजों में जिंदा लोगों का अंतिम संस्कार, साढ़े 4 लाख रुपये की गड़बड़ी

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पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड की दरमाहा पंचायत में कबीर अंत्येष्टि योजना में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच में जिंदा लोगों के नाम पर राशि निकाले जाने और साढ़े 4 लाख रुपये की अनियमितता की पुष्टि हुई है।

मोतिहारी/आलम की खबर:पूर्वी चंपारण जिले से सरकारी योजना में गड़बड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार के समय आर्थिक सहायता देने वाली कबीर अंत्येष्टि योजना में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आई है। आरोप है कि कल्याणपुर प्रखंड की दरमाहा पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर सरकारी राशि का भुगतान किया गया। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ ऐसे लोगों के नाम पर भी योजना की राशि निकाल ली गई, जो वास्तव में जीवित हैं।

मामले का खुलासा विभागीय जांच के बाद हुआ है। जांच रिपोर्ट में करीब साढ़े चार लाख रुपये की राशि के गलत तरीके से भुगतान की पुष्टि की गई है। इसके अलावा कई ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ दिए जाने की बात सामने आई है, जो निर्धारित पात्रता के अनुसार इसके हकदार नहीं थे। दूसरी ओर वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया।

कबीर अंत्येष्टि योजना सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक सहायता योजना है, जिसके तहत गरीब परिवारों में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अंतिम संस्कार जैसे कठिन समय में आर्थिक परेशानी का सामना कम करना पड़े। लेकिन मोतिहारी में सामने आए इस मामले ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरमाहा पंचायत में योजना को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय स्तर पर लोगों ने कई बार अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय विधायक शालिनी मिश्रा ने जिलाधिकारी से जांच कराने की मांग की। जिलाधिकारी के निर्देश पर डीआरडीए निदेशक कुंदन कुमार के नेतृत्व में जांच कराई गई।

जांच टीम ने पंचायत स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड, लाभार्थियों की सूची, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और योजना के नियमों की जांच की। इस दौरान कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे योजना के संचालन में लापरवाही और नियमों की अनदेखी का संकेत मिला। जांच में पाया गया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों के नाम पर सहायता राशि जारी की गई, जिनकी मृत्यु का कोई वास्तविक रिकॉर्ड नहीं था।

इसके अलावा कई ऐसे लाभार्थियों को भी भुगतान किया गया, जो गरीबी रेखा से नीचे आने वाली श्रेणी के बजाय अन्य श्रेणी में शामिल थे। जांच अधिकारियों के अनुसार योजना का लाभ केवल पात्र लोगों को मिलना चाहिए था, लेकिन पंचायत स्तर पर इस नियम का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

मामले में पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। आरोप है कि पंचायत स्तर पर जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत से सरकारी राशि का गलत तरीके से भुगतान किया गया। हालांकि प्रशासन की ओर से अंतिम जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

डीआरडीए निदेशक कुंदन कुमार ने भी जांच के दौरान योजना में अनियमित भुगतान की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखा जा रहा है कि इस गड़बड़ी में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले के सामने आने के बाद जिले में संचालित अन्य सरकारी योजनाओं की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पूर्वी चंपारण में इससे पहले भी कुछ विकास योजनाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। केसरिया और पताही इलाके में विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों के बाद अब कबीर अंत्येष्टि योजना का मामला सामने आया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जिले की सभी पंचायतों में सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड की गहराई से जांच कराई जाए तो कई और गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। ग्रामीणों की मांग है कि योजनाओं की निगरानी मजबूत की जाए ताकि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए जारी सरकारी सहायता सही लोगों तक पहुंच सके।

कबीर अंत्येष्टि योजना जैसी संवेदनशील योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी गरीब परिवारों के अधिकारों से जुड़ा मामला है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करे।

फिलहाल मोतिहारी के इस मामले में प्रशासनिक जांच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद किन लोगों पर कार्रवाई होती है और सरकारी राशि की रिकवरी के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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कबीर अंत्येष्टि योजना जैसी योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए बनाई जाती हैं। ऐसे में यदि योजना की राशि गलत तरीके से निकाल ली जाती है तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि जरूरतमंद लोगों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।

मोतिहारी में सामने आया मामला बताता है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत करने की जरूरत है। सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए नियमित जांच और जवाबदेही तय करना जरूरी है।

जांच के बाद यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गरीबों के हक की राशि का दुरुपयोग करने की हिम्मत न कर सके।

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