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नवादा सदर अस्पताल में सड़क हादसे के घायलों की मौत के बाद बवाल, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप

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नवादा सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल दो युवकों की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में देरी का आरोप लगाया। अस्पताल प्रबंधन से मारपीट मामले में पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है।

नवादा/आलम की खबर:नवादा सदर अस्पताल में इलाज व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क हादसे में घायल होकर इलाज के लिए पहुंचे दो युवकों की मौत के बाद रविवार को अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई और अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई। घटना के बाद पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया है और मामले में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही है।

मृतकों की पहचान नवादा जिले के बुंदेलखंड थाना क्षेत्र अंतर्गत मोगलाखर मोहल्ला निवासी मोहम्मद कैफ और मोहम्मद आतिफ के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार दोनों युवक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद परिजन उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर नवादा सदर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इलाज के दौरान दोनों युवकों की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद दोनों युवक गंभीर हालत में अस्पताल लाए गए थे और उस समय उनमें जान थी। परिवार वालों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी। मृतक मोहम्मद कैफ के पिता मोहम्मद मंजर ने आरोप लगाया कि करीब एक घंटे 40 मिनट तक दोनों युवकों का इलाज शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अगर समय पर डॉक्टरों ने इलाज किया होता तो शायद दोनों युवकों की जान बच सकती थी।

परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत भी दी है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत इलाज मिलना चाहिए, लेकिन यहां देरी के कारण दो परिवारों ने अपने बेटों को खो दिया। घटना के बाद परिवार वालों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

दोनों युवकों की मौत के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और जवाबदेही तय करने की मांग की। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य के साथ मारपीट की घटना हो गई। बताया जा रहा है कि हंगामे के दौरान कुछ लोगों ने अस्पताल प्रबंधक के साथ हाथापाई की, जिसकी जांच अब पुलिस कर रही है।

मारपीट की पूरी घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पहचान होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने मामले को लेकर कहा कि ड्यूटी के दौरान संबंधित डॉक्टर के अनुपस्थित रहने की शिकायत मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन की ओर से भी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।

नवादा सदर अस्पताल में सामने आई इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों में आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत इलाज मिलना सबसे जरूरी माना जाता है, क्योंकि हादसे और गंभीर बीमारी के मामलों में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में इलाज में किसी भी प्रकार की देरी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

हालांकि अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट भी गंभीर मामला है। स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी है। किसी भी विवाद का समाधान जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है कि जहां इलाज व्यवस्था की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, वहीं अस्पताल में हुई मारपीट के दोषियों पर भी कार्रवाई की जाए।

नवादा सदर अस्पताल की यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर कई सवाल छोड़ गई है। अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जिले के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।

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नवादा सदर अस्पताल की घटना केवल दो युवकों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। आपात स्थिति में पहुंचे मरीजों को समय पर इलाज मिलना उनकी जिंदगी बचाने के लिए सबसे जरूरी होता है। अगर कहीं व्यवस्था में कमी है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

वहीं अस्पताल परिसर में किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के साथ हिंसा भी स्वीकार्य नहीं हो सकती। स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जवाबदेही और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और अस्पताल की व्यवस्था में सुधार हो।

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