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सीवान मॉडल सदर अस्पताल में 16 वर्षीय दीपक की मौत, दवा और इलाज की कमी पर उठे गंभीर सवाल

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सीवान मॉडल सदर अस्पताल में सांप काटने से पहुंचे 16 वर्षीय दीपक कुमार की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने दवा और इलाज में देरी का आरोप लगाया।

सीवान/आलम की खबर:सीवान जिले के मॉडल सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, आवश्यक दवाओं की अनुपलब्धता और इलाज की प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर मरीजों के परिजनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ताजा मामला पचरूखी थाना क्षेत्र के जसौली गांव के 16 वर्षीय दीपक कुमार की मौत से जुड़ा है, जिसके बाद अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार जसौली गांव निवासी दीपक कुमार अपने खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान उसे जहरीले सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिवार के लोगों ने बिना समय गंवाए उसे इलाज के लिए सीवान के मॉडल सदर अस्पताल पहुंचाया। परिजनों के अनुसार घटना के करीब आधे घंटे के अंदर ही दीपक को अस्पताल लाया गया था।

परिवार का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के समय दीपक की स्थिति इतनी खराब नहीं थी। वह खुद चलकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचा था और बातचीत भी कर रहा था। लेकिन आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज की प्रक्रिया में हुई देरी और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बाद काफी देर तक चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि सांप काटने जैसे गंभीर मामले में तुरंत इलाज और एंटी वेनम इंजेक्शन की जरूरत होती है, लेकिन अस्पताल की व्यवस्था उन्हें परेशान करने वाली साबित हुई।

परिजनों के मुताबिक इलाज के दौरान कई आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। मजबूरी में उन्हें बाहर से दवाएं खरीदकर लानी पड़ीं। उनका आरोप है कि जीवन बचाने वाले उपचार में समय निकलता गया और इसी वजह से दीपक की स्थिति गंभीर होती चली गई।

परिवार ने बताया कि एंटी वेनम इंजेक्शन देने के लिए जरूरी DNS बोतल तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। इसे भी उन्हें बाजार से खरीदकर लाना पड़ा। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर सभी जरूरी सुविधाएं मिल जातीं तो शायद दीपक की जान बच सकती थी।

मृतक के भाई ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मरीज की हालत देखकर भी व्यवस्था तेजी से सक्रिय नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सांप काटने के मरीज के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अस्पताल में इलाज शुरू कराने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी।

वहीं इस मामले को लेकर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने भी अस्पताल की कुछ व्यवस्थागत परेशानियों की ओर इशारा किया। डॉक्टर का कहना था कि इमरजेंसी में मरीजों की संख्या अधिक रहती है और कई जिम्मेदारियां एक ही चिकित्सक को संभालनी पड़ती हैं। दवाओं की उपलब्धता डॉक्टरों के स्तर से तय नहीं होती है।

इस घटना के बाद सदर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जिला अस्पताल में ही जरूरी दवाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे तो गरीब मरीज कहां जाएंगे।

लोगों ने मांग की है कि इमरजेंसी सेवा को मजबूत किया जाए और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित की जाए। खासकर सांप काटने जैसी घटनाओं में तत्काल इलाज की व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।

बताया जा रहा है कि अस्पताल में कुछ सामान्य जरूरत की दवाओं और इंजेक्शन की कमी को लेकर भी पहले शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में दीपक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।

मामले को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उपाधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह से संपर्क नहीं हो सका। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

दीपक की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जमीनी हकीकत क्या है। मरीजों और उनके परिजनों को समय पर इलाज, डॉक्टर और दवा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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