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NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, MBBS छात्र अर्पित सिंह पर सॉल्वर सिंडिकेट चलाने का आरोप

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NEET पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार मेडिकल छात्र अर्पित सिंह ने सॉल्वर नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें कई लोग और बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:NEET पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में एक मेडिकल छात्र का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, मगध मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र अर्पित सिंह ने कथित तौर पर सॉल्वर सिंडिकेट तैयार किया था, जिसके माध्यम से परीक्षा में असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे छात्रों को बैठाने की योजना बनाई गई थी।

जांच के मुताबिक, मुजफ्फरपुर के भगवानपुर इलाके के यादव नगर निवासी अर्पित सिंह इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वह मगध मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्र है। पुलिस का दावा है कि अर्पित ने पढ़ाई के साथ-साथ एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें सॉल्वर की व्यवस्था करने से लेकर परीक्षा केंद्रों पर पहचान जांच को प्रभावित करने तक की कोशिश की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गया पुलिस की टीम ने मगध मेडिकल कॉलेज के ओल्ड बॉयज हॉस्टल में अर्पित सिंह के कमरे की तलाशी ली। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसका इलेक्ट्रॉनिक टैब जब्त किया है। जांच टीम को आशंका है कि इस उपकरण में नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग, संपर्क नंबर और डिजिटल जानकारी मिल सकती है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अर्पित सिंह ने कथित रूप से पैसे का लालच देकर कई छात्रों को सॉल्वर के तौर पर तैयार किया था। इन लोगों को अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर भेजने की योजना बनाई गई थी, ताकि वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह वे परीक्षा दे सकें।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र पर एक युवक को दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरपुर के कांटी क्षेत्र के हरचंदा गांव निवासी विवेक कुमार इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। पूछताछ के दौरान विवेक से मिली जानकारी के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया।

विवेक से पूछताछ के बाद पुलिस ने लखीसराय के कई परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई की। जांच के दौरान केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय सहित कई स्थानों से कथित तौर पर सॉल्वर गिरोह से जुड़े नौ लोगों को पकड़ा गया।

पुलिस का कहना है कि यह पूरा मामला केवल सॉल्वर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा की पहचान प्रक्रिया को प्रभावित करने की भी कोशिश की गई थी। जांच में यह बात सामने आई है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने के लिए कुछ लोगों से संपर्क किया गया था।

आरोप है कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था को कमजोर करने के लिए पहले से योजना बनाई गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर तक इसकी पहुंच थी।

जांच के दौरान रंजित कुमार और रविशंकर सहित कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किसने किस स्तर पर इस फर्जीवाड़े में सहयोग किया।

फिलहाल पुलिस अर्पित सिंह, विवेक कुमार और रंजित कुमार सहित गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच टीम मोबाइल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है।

NEET जैसी महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसी परीक्षाओं में लाखों छात्र मेहनत करते हैं, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकना प्रशासन और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इससे कितने अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

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प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा केवल एक अपराध नहीं बल्कि मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। NEET जैसी परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

इस मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोषियों तक पहुंचना और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

परीक्षा प्रणाली में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन उसके साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई से ही छात्रों का भरोसा कायम रह सकता है।

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