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Vigilance Raid Bihar: बेगूसराय में 4 हजार रुपये रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार, 4 लाख के आपदा मुआवजे की फाइल से जुड़ा मामला

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Begusarai News | Vigilance Raid Bihar | बेगूसराय सदर अंचल में निगरानी विभाग ने 4 हजार रुपये रिश्वत लेते क्लर्क सोनू कुमार को गिरफ्तार किया। मामला 4 लाख रुपये के आपदा मुआवजे से जुड़ा है।

बेगूसराय, 7 अगस्त। सरकारी मुआवजे की राशि के लिए लंबे समय से कार्यालय का चक्कर लगा रही एक महिला की शिकायत पर निगरानी विभाग ने बेगूसराय सदर अंचल कार्यालय में कार्रवाई करते हुए एक क्लर्क को चार हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कर्मचारी की पहचान तेघड़ा थाना क्षेत्र के हसनपुर गांव निवासी सोनू कुमार के रूप में हुई है। वह सदर अंचल कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत बताया गया है। ताजा रिपोर्टों में भी चार हजार रुपये की रिश्वत और चार लाख रुपये के आपदा मुआवजे से जुड़े इसी मामले की पुष्टि हुई है।

मामला सदर प्रखंड क्षेत्र के चांदपुर गांव की रहने वाली दौलती देवी से जुड़ा है। उनकी बेटी रानी कुमारी की छठ पर्व के दौरान स्नान करने के क्रम में डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद सरकारी प्रावधान के तहत मृतका के परिजनों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलनी थी। लेकिन मुआवजे से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने में कथित तौर पर लगातार देरी होती रही।

दौलती देवी के अनुसार, मुआवजे की फाइल करीब एक साल से कार्यालय में लंबित थी। राशि मिलने की उम्मीद में वह बार-बार अंचल कार्यालय पहुंचती रहीं। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने और मुआवजे की राशि जारी कराने के बदले उनसे रिश्वत की मांग की गई।

पहले बड़ी रकम की मांग, फिर 4 हजार पर सौदा

शिकायतकर्ता के आरोप के मुताबिक, क्लर्क सोनू कुमार ने शुरुआत में 80 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में कथित तौर पर रकम घटकर पांच हजार रुपये तक पहुंची। आर्थिक परेशानी का हवाला देते हुए दौलती देवी ने रकम कम करने की गुहार लगाई। इसके बाद चार हजार रुपये में कथित रूप से बात तय हुई।

महिला का कहना था कि कई दिनों से रिश्वत की रकम के लिए दबाव बनाया जा रहा था। आखिरकार परेशान होकर उसने मामले की शिकायत निगरानी विभाग से करने का फैसला लिया।

शिकायत के बाद शुरू हुआ सत्यापन

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। निगरानी विभाग ने इसके बाद आरोपी कर्मचारी को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना तैयार की।

ताजा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, निगरानी टीम ने शिकायत की पुष्टि के बाद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की तैयारी की थी।

चार हजार रुपये लेते ही दबोचा

शुक्रवार को निगरानी टीम ने सदर अंचल कार्यालय में जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम लेकर आरोपी कर्मचारी के पास पहुंची। जैसे ही सोनू कुमार ने चार हजार रुपये लिए, निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

कार्यालय परिसर में अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। निगरानी टीम आरोपी को अपने साथ ले गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तारी उसके कार्यालय कक्ष से ही की गई।

मुआवजे की फाइल के बदले रिश्वत का आरोप

इस पूरे मामले की खास बात यह है कि रिश्वत की कथित मांग किसी निजी काम के लिए नहीं, बल्कि एक परिवार को मिलने वाली सरकारी आपदा सहायता की राशि से संबंधित फाइल को आगे बढ़ाने के लिए किए जाने का आरोप है।

रानी कुमारी की डूबने से मौत के बाद परिवार को चार लाख रुपये की सरकारी अनुग्रह राशि मिलनी थी। लेकिन मुआवजे की प्रक्रिया लंबित रहने से परिवार को लंबे समय तक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ा। आरोप है कि इसी दौरान फाइल के निस्तारण के लिए रिश्वत मांगी गई।

निगरानी की कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में संदेश

निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार सरकार की निगरानी व्यवस्था भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई के लिए सक्रिय है। राज्य के आधिकारिक निगरानी विभाग के अनुसार भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें निगरानी विभाग और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के समक्ष दी जा सकती हैं।

बेगूसराय की इस कार्रवाई ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि आपदा में किसी परिजन को मिलने वाली सहायता राशि की फाइल अगर लंबे समय तक लंबित रहती है तो उसकी निगरानी और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। एक तरफ परिवार अपनी बेटी की मौत के बाद सरकारी सहायता का इंतजार कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ फाइल को लेकर रिश्वत मांगने के आरोप ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। आरोपी कर्मचारी से पूछताछ और अन्य औपचारिकताओं के बाद उसे संबंधित विशेष अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया की जाएगी।

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• बेगूसराय सदर अस्पताल में शव से जुड़ी लापरवाही का मामला, परिजनों को घंटों करना पड़ा इंतजार।

• बिहार में सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई।

मुआवजे के लिए भटकती रही मां, रिश्वत के आरोप ने खोली व्यवस्था की परत

आपदा में किसी परिवार का सदस्य खोना अपने आप में सबसे बड़ा संकट होता है। ऐसे समय में सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार के लिए महज एक राशि नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सहारा होती है। यदि उसी सहायता की फाइल महीनों तक कार्यालयों में अटकी रहे और उसे आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप सामने आए, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। बेगूसराय की घटना में निगरानी की कार्रवाई ने कम से कम इतना जरूर दिखाया है कि शिकायत मिलने पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और ट्रैप कार्रवाई संभव है। लेकिन असली सुधार तब माना जाएगा जब आपदा मुआवजे जैसे मामलों के लिए ऐसी व्यवस्था बने, जिसमें लाभार्थी को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और फाइल की हर स्थिति ऑनलाइन या पारदर्शी तरीके से सामने हो। सरकारी सहायता पाने के लिए किसी गरीब या पीड़ित परिवार को रिश्वत देने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। निगरानी की कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी यह जांच जरूरी है कि करीब एक साल तक मुआवजे की फाइल लंबित क्यों रही और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

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