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रोसड़ा संत कबीर मठ में दो दिवसीय कबीर जयंती समारोह शुरू, संतों ने दिया भाईचारे का संदेश

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रोसड़ा स्थित संत कबीर मठ में संत कबीर जयंती पर दो दिवसीय धार्मिक समारोह शुरू हुआ। संतों ने कबीर साहेब की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

रोसड़ा/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के रोसड़ा स्थित संत कबीर मठ में संत सम्राट सद्गुरु कबीर साहेब की जयंती के अवसर पर दो दिवसीय धार्मिक समारोह का शुभारंभ हुआ। लक्ष्मीपुर बगीचा परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संत-महंत, विद्वान, श्रद्धालु और सामाजिक लोगों ने भाग लिया। समारोह के पहले दिन पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान के साथ की गई। दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चारण के बाद संतों ने सत्संग, प्रवचन और कबीर वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को संत कबीर साहेब के विचारों से अवगत कराया। वक्ताओं ने कहा कि संत कबीर की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं।

समारोह की अध्यक्षता संत कबीर मठ, महादेव मठ रोसड़ा के महंत सुरेश साहब ने की। वहीं कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष और पीठाधीश्वर महंत दीप नारायण साहब ने दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे संतों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महंत बिहारी साहब सलोना उपस्थित रहे। इसके अलावा रतन स्वरूप साहेब पूर्णिया, आचार्य सुरेश साहब रोसड़ा, शिक्षाविद् प्रो. शिव शंकर प्रसाद सिंह सहित कई संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

संतों ने अपने प्रवचन में कहा कि संत कबीर साहेब ने समाज को प्रेम, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाया था। उन्होंने हमेशा जाति-पंथ, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देने की सीख दी। आज के समय में भी उनके विचार समाज के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

पीठाधीश्वर महंत दीप नारायण साहब ने कहा कि संत कबीर साहेब का जीवन समाज सुधार और मानव कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने लोगों को बाहरी आडंबर से दूर रहकर सत्य, प्रेम और सदाचार के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे संत कबीर की वाणी और उनके विचारों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन में भी अपनाएं। समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना ही कबीर साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समारोह के दौरान भजन-कीर्तन और सत्संग का भी आयोजन किया गया। कबीर वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने संतों के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और कबीर साहेब के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय इस धार्मिक कार्यक्रम का दूसरा दिन भी विशेष आयोजन के साथ मनाया जाएगा। रविवार को भजन, कीर्तन, प्रवचन और सत्संग सहित कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसमें समस्तीपुर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

संत कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देने का माध्यम भी बना। संतों ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज को आपसी विश्वास और सद्भाव की जरूरत है, तब कबीर साहेब की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं।

उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने अपने विचारों के माध्यम से लोगों को मानवता को सबसे ऊपर रखने की प्रेरणा दी। उनके संदेश आज भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।

रोसड़ा के संत कबीर मठ में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी देखने को मिली। धार्मिक वातावरण, संतों के प्रवचन और कबीर वाणी से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा।

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संत कबीर साहेब के विचार सदियों बाद भी समाज के लिए प्रेरणादायक बने हुए हैं। उन्होंने मानवता, समानता और आपसी प्रेम का जो संदेश दिया, उसकी जरूरत आज भी महसूस की जाती है।

ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। कबीर साहेब की शिक्षाओं को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है।

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