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“विश्वसनीयता बचाने की चुनौती: प्रेस दिवस पर पत्रकारों ने स्वीकारा,कुछ लोग पेशे की इज़्ज़त दांव पर लगा रहे हैं”

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मोहम्मद आलम प्रधान संपादक 
      (alamkikhabar.com)
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गलत सूचना, गिरता पत्रकारिता स्तर और विश्वसनीयता की रक्षा” पर पत्रकारों ने खुलकर रखी बात
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समस्तीपुर,16 नवम्बर 2025:
राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर जिला अतिथि गृह, समस्तीपुर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ पत्रकारों, रिपोर्टरों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय रहा— “बढ़ती गलत सूचना के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा करना।”

बैठक की शुरुआत सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने पत्रकारिता की मौजूदा स्थिति और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए की। इसके बाद पत्रकारों ने बदलते मीडिया परिवेश और चुनौतियों पर खुलकर अपने विचार रखे।

गिरते पत्रकारिता स्तर पर पत्रकारों ने जताई चिंता

चर्चा के दौरान कई पत्रकारों ने साफ कहा कि आज मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती फेक न्यूज़ और भ्रम फैलाने वाली सूचनाएं हैं। लेकिन उससे भी गंभीर चिंता यह है कि पत्रकारिता का स्तर लगातार गिर रहा है।

पत्रकारों ने स्वीकार किया कि कुछ लोग थोड़े आर्थिक लाभ या तीव्र प्रतिस्पर्धा की वजह से बिना सत्यापन के खबरें प्रकाशित कर देते हैं, जिससे न केवल पत्रकारिता की साख मिट्टी में मिलती है बल्कि पूरे मीडिया समुदाय की मेहनत पर भी बुरा असर पड़ता है। कई वक्ताओं ने कहा—
“कुछ पत्रकार थोड़े लाभ के लालच में अपनी पहचान और संस्थान की विश्वसनीयता को दांव पर लगा देते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल मीडिया के लिए घातक है बल्कि जनता का भरोसा भी कमजोर करती है।”

फेक्ट-चेकिंग और प्रशिक्षण पर जोर

पत्रकारों ने इस बात पर सहमति जताई कि असत्यापित खबरों के दौर में मीडिया संस्थानों को फेक्ट-चेकिंग सेल को मजबूत करना चाहिए। साथ ही, नए पत्रकारों को नियमित प्रशिक्षण देकर गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता है। कई पत्रकारों ने कहा कि खबरों की गति से ज्यादा खबरों की सत्यता महत्वपूर्ण है।

पत्रकार सुरक्षा और स्वतंत्रता भी उठे मुद्दे

कार्यक्रम में पत्रकारों ने प्रशासन से यह मांग भी की कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कई पत्रकारों ने बताया कि दबाव, धमकी और दबाव बनाने वाले तत्व पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं।

प्रेस की विश्वसनीयता लोकतंत्र की रीढ़

कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर दिया कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी विश्वसनीयता टूटना देश और समाज दोनों के लिए खतरनाक संकेत है। इसलिए सटीक, संतुलित और जिम्मेदार पत्रकारिता ही मीडिया की असली पहचान होनी चाहिए।

अंत में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का आश्वासन दिया और पत्रकारों को निष्पक्ष, निर्भीक तथा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग के लिए प्रेरित किया।

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