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Bihar Police News: सलखुआ थाना दलाली मामले में बड़ी कार्रवाई, थानेदार समेत 10 पुलिसकर्मी निलंबित

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आलम की खबर: सहरसा के सलखुआ थाना में कथित दलाली और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। थानेदार समेत 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और SIT जांच शुरू कर दी गई है।

सहरसा/आलम की खबर:बिहार पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार और कथित दलाली के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कोसी रेंज के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने सहरसा जिले के सलखुआ थाना में तैनात थानाध्यक्ष समेत 10 पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला थाना स्तर पर कथित दलाली, पुलिसकर्मियों की संलिप्तता और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोपों का है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस कार्रवाई को बिहार पुलिस की हाल के दिनों की सबसे बड़ी विभागीय कार्रवाइयों में माना जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कथित दलाल सतीश कुमार पर आरोप है कि वह सलखुआ थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष मुकेश कुमार और एसआई रविता कुमारी के माध्यम से थाना स्तर पर अवैध दलाली का नेटवर्क चला रहा था। जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि सतीश कुमार का भाई चंद्रकिशोर रजक मादक पदार्थों के अवैध सिंडिकेट के संचालन में शामिल है। इन शिकायतों के बाद पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया और उच्च अधिकारियों ने तत्काल जांच शुरू कराई।

बताया गया कि 2 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सलखुआ थाना का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान थानाध्यक्ष और कथित दलाल सतीश कुमार के बीच मोबाइल पर बातचीत होने की पुष्टि हुई। इसके बाद गोसपुर मंदिर के समीप जांच टीम ने एक संदिग्ध व्यक्ति को नीले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल के साथ रोका। तलाशी लेने पर उसके पास मौजूद काले बैग से लैपटॉप, की-बोर्ड, माउस, चार्जर तथा पिपरा, सलखुआ और नवहट्टा थाना की मूल कांड दैनिकी (केस डायरी) बरामद की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार थाना की मूल केस डायरी का किसी बाहरी व्यक्ति के पास मिलना बेहद गंभीर मामला है और इसी के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच टीम ने कथित दलाल सतीश कुमार को हिरासत में लेकर उससे लंबी पूछताछ की। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सलखुआ थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में सतीश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कुल 10 पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कोसी रेंज के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने स्पष्ट किया है कि पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार, दलाली या किसी भी प्रकार की अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी थाना या पुलिस कार्यालय में अवैध वसूली, दलाली या अन्य गलत गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में SIT की जांच के आधार पर और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस मुख्यालय पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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संपादकीय: पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे बड़ी आवश्यकता

सलखुआ थाना प्रकरण यह संदेश देता है कि कानून लागू करने वाली व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है। यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो इससे आम लोगों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत होगा। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई यह भी साबित करती है कि व्यवस्था के भीतर गलत करने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा।

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