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Bihar Bhumi: मधुबनी में सरकारी पोखर जमीन घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, मेयर पुत्र और उपमेयर समेत 47 लोगों पर FIR

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Alam Ki Khabar: मधुबनी में सरकारी पोखर की जमीन पर कथित अवैध अतिक्रमण और फर्जी निबंधन मामले में मेयर के पुत्र, उपमेयर समेत 47 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है। जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद भूमाफियाओं पर शिकंजा कसने की चर्चा तेज हो गई है।

मधुबनी/आलम की खबर:बिहार के मधुबनी जिले में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी निबंधन के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी में नगर निगम के मेयर के पुत्र, उपमेयर सहित कुल 47 लोगों को नामजद किया गया है। यह कार्रवाई रहिका अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) के आवेदन पर जिला प्रशासन के निर्देश के बाद की गई है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे और भूमाफियाओं के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।

प्राथमिकी के अनुसार नगर थाना क्षेत्र के तिलक चौक स्थित केंद्रीय पुस्तकालय के पीछे थाना संख्या-33, खाता संख्या-312, खेसरा संख्या-89 की लगभग 3 बीघा 18 कट्ठा 7 धुर भूमि राजस्व अभिलेखों में गैरमजरूआ खास (सरकारी पोखर) के रूप में दर्ज है। आरोप है कि पिछले करीब चार दशकों के दौरान इस सरकारी भूमि का कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निबंधन कराया गया और धीरे-धीरे पोखर को भरकर उस पर मकान, दुकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा अन्य निर्माण कर दिए गए।

जिला प्रशासन की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों की पहचान करते हुए कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया। इसी क्रम में रहिका अंचल के अंचलाधिकारी ने नगर थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। नगर थाना कांड संख्या 337/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में नगर निगम के मेयर अरुण राय के पुत्र प्रशांत कुमार, उपमेयर अमानुल्लाह खान, पूर्व नगर परिषद चेयरमैन रेखा नायक के पति सुनील नायक, समीउल्लाह खान समेत कुल 47 लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि सरकारी भूमि पर फर्जी कागजात तैयार कर निबंधन कराया गया और बाद में उस जमीन की खरीद-बिक्री भी की गई। हालांकि, मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही होगी।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि पहली बार सरकारी भूमि से जुड़े इतने बड़े मामले में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ सामूहिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कब्जे हटाने के लिए आगे भी अभियान जारी रहेगा।

गौरतलब है कि कुछ सप्ताह पहले मधुबनी के पुलिस अधीक्षक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इस एफआईआर को उसी कार्रवाई की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, संभावित गिरफ्तारी और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में नामजद व्यक्तियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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विशेष विश्लेषण

सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामलों में प्रशासन की कार्रवाई आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मधुबनी का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं। अब यह देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और प्रशासन अपने दावों के अनुरूप कार्रवाई को कितना प्रभावी ढंग से अंजाम देता है।

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