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Two Children Mother Become SDM: दो बच्चों की मां रुचि रानी बनीं SDM, BPSC में हासिल की 260वीं रैंक

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Alam Ki Khabar | दो बच्चों की मां रुचि रानी ने BPSC 70वीं परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल कर SDM बनने का सपना पूरा किया। जानिए कैसे परिवार, टाइम मैनेजमेंट और 4.5 साल की मेहनत ने उन्हें सफलता दिलाई।

पटना/आलम की खबर:शादी, परिवार और दो बच्चों की जिम्मेदारी के बीच प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना अक्सर अधूरा रह जाता है। लेकिन बिहार की रुचि रानी ने यह धारणा बदल दी। उन्होंने घर-परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल की और बिहार प्रशासनिक सेवा में SDM बनने का सपना साकार कर दिखाया। उनकी सफलता आज हजारों महिलाओं और प्रतियोगी छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।

रुचि रानी की सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है। उन्होंने लगातार साढ़े चार वर्षों तक कठिन परिश्रम किया। घर के काम, बच्चों की देखभाल और पढ़ाई के बीच उन्होंने ऐसा संतुलन बनाया कि आखिरकार सफलता उनके कदम चूमने लगी। उनका कहना है कि लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं।

रुचि अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार, विशेष रूप से अपने पति प्रभाकर भारद्वाज को देती हैं। उनका कहना है कि यदि परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो इतनी लंबी तैयारी करना आसान नहीं होता। उन्होंने बताया कि उनके पति ने हर कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाया और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया।

रुचि की इस यात्रा के पीछे उनकी मां का अधूरा सपना भी बड़ी प्रेरणा बना। उनकी मां ने भी कभी BPSC अधिकारी बनने का सपना देखा था और परीक्षा दी थी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। मां का वही सपना रुचि ने अपना लक्ष्य बना लिया। उन्होंने तय कर लिया कि वह इस अधूरे सपने को पूरा करेंगी और आखिरकार उन्होंने यह कर दिखाया।

रुचि बताती हैं कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र 'टाइम मैनेजमेंट' रहा। वह खाना बनाते समय मोबाइल पर करंट अफेयर्स सुनती थीं। बच्चों के सो जाने के बाद देर रात तक पढ़ाई करती थीं और नौकरी के दौरान मिलने वाले छोटे-छोटे खाली समय का भी उपयोग पढ़ाई में करती थीं। उनका मानना है कि सफलता के लिए हर मिनट की कीमत समझनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा कुछ महीनों की तैयारी से नहीं निकलती। इसके लिए लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास जरूरी है। कई बार असफलता और निराशा भी सामने आई, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका विश्वास था कि लगातार प्रयास करने वालों को एक दिन सफलता जरूर मिलती है।

रुचि के पति प्रभाकर भारद्वाज ने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं के आधार पर महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच बनाना गलत है। यदि परिवार साथ दे तो महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

रुचि चाहती हैं कि उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बने। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नकारात्मक सोच से दूर रहें और अपने लक्ष्य पर पूरी ईमानदारी से काम करें। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती।

उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जिम्मेदारियां सपनों की राह में रुकावट नहीं बल्कि उन्हें और मजबूत बनाने का माध्यम बन सकती हैं। आज रुचि रानी उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की नई मिसाल बन चुकी हैं जो परिवार के साथ अपने करियर के बड़े सपने भी देखती हैं।

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सपनों की उड़ान जिम्मेदारियों से बड़ी होती है

रुचि रानी की कहानी बताती है कि सफलता का रास्ता परिस्थितियों से नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प से तय होता है। यदि परिवार का सहयोग, समय का सही उपयोग और लगातार मेहनत साथ हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं रहता। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का मजबूत संदेश है।

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