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Bihar Toll Tax Policy 2026: बिहार में पहली बार स्टेट हाईवे, पुल और बाइपास पर लगेगा टोल टैक्स, जानिए नई दरें और नियम

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Alam ki khabar:बिहार ने पहली बार राज्य की टोल टैक्स नीति लागू कर दी है। अब स्टेट हाईवे, बड़े पुल, बाइपास और सुरंगों पर टोल वसूला जाएगा। जानिए किन वाहनों को छूट मिलेगी, प्रति किलोमीटर दरें क्या होंगी और FASTag से जुड़े नए नियम।

पटना/आलम की खबर: बिहार में सड़क परिवहन व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को "बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली-2026" की अधिसूचना जारी कर राज्य की पहली टोल टैक्स नीति लागू कर दी है। अब राष्ट्रीय राजमार्गों की तर्ज पर राज्य सरकार के अधीन आने वाले स्टेट हाईवे, बड़े पुल, बाइपास और सुरंगों पर भी वाहन चालकों को टोल टैक्स देना होगा। इस फैसले के बाद राज्य सरकार के अधीन बनने वाली उच्च स्तरीय सड़कों के उपयोग पर शुल्क लिया जाएगा और सड़क निर्माण व रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत सड़क की चौड़ाई और लेनों की संख्या के आधार पर टोल की दरें तय की गई हैं। चार लेन या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर 100 प्रतिशत, दो लेन से अधिक लेकिन चार लेन से कम चौड़ी सड़कों पर 60 प्रतिशत तथा 5.5 मीटर चौड़ी मध्यवर्ती लेन वाली सड़कों पर निर्धारित दर का 50 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। वहीं 5.5 मीटर से कम चौड़ी सड़कों को टोल के दायरे से बाहर रखा गया है।

नई नियमावली के अनुसार टोल वसूली पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी। वाहन चालकों को FASTag या सरकार द्वारा स्वीकृत अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान करना होगा। बिना FASTag वाले वाहनों से अधिक शुल्क लिया जाएगा। यदि कोई वाहन बिना टोल शुल्क चुकाए गुजरता है तो उससे निर्धारित टोल का तीन गुना जुर्माना वसूला जाएगा। ओवरलोड वाहनों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।

पथ निर्माण विभाग पहले उन स्टेट हाईवे, पुलों, बाइपास और सुरंगों का चयन करेगा जहां टोल वसूली शुरू की जाएगी। इसके लिए संबंधित मार्गों पर वाहनों की संख्या और यातायात का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद निजी एजेंसियों के चयन के लिए निविदा जारी होगी और चयनित एजेंसियां टोल संग्रह का कार्य संभालेंगी।

नई नीति में पुलों के लिए अलग गणना प्रणाली लागू की गई है। किसी परियोजना में पुल की लंबाई को दस गुना मानकर टोल दूरी निर्धारित की जाएगी। उदाहरण के लिए यदि किसी परियोजना की कुल लंबाई 50 किलोमीटर है और उसमें 5 किलोमीटर लंबा पुल शामिल है तो टोल की गणना 95 किलोमीटर के आधार पर होगी। यानी 45 किलोमीटर सड़क और पुल की प्रभावी दूरी 50 किलोमीटर जोड़कर कुल दूरी तय की जाएगी।

सरकार ने कुछ श्रेणियों के वाहनों को टोल शुल्क से छूट भी दी है। दोपहिया वाहन, तिपहिया वाहन, ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर तथा पशु चालित वाहन टोल से मुक्त रहेंगे। हालांकि जहां सर्विस रोड उपलब्ध होगी वहां यह छूट लागू नहीं होगी। नियमित स्थानीय यात्रियों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए रियायती पास, मासिक पास तथा मल्टीपल ट्रिप पास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने प्रति किलोमीटर टोल शुल्क भी तय कर दिया है। कार, जीप, वैन और अन्य हल्के वाहनों पर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर, छोटे व्यावसायिक वाहनों पर 2 रुपये प्रति किलोमीटर, बस और दो धुरी वाले ट्रकों पर 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर, तीन धुरी वाले वाणिज्यिक वाहनों पर 4.60 रुपये प्रति किलोमीटर, छह धुरी वाले भारी निर्माण उपकरणों पर 6.65 रुपये प्रति किलोमीटर तथा सात या उससे अधिक धुरी वाले बड़े वाहनों पर 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल लिया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि टोल की दरें स्थायी नहीं होंगी। महंगाई, रखरखाव खर्च और सड़क परियोजनाओं की जरूरतों को देखते हुए हर वर्ष इन दरों की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल पथ निर्माण विभाग उन प्रमुख मार्गों का सर्वे कर रहा है जहां सबसे पहले टोल प्लाजा स्थापित किए जाएंगे। नई नीति लागू होने के बाद राज्य में सड़क यात्रा की लागत बढ़ेगी, लेकिन सरकार का दावा है कि इससे बेहतर सड़क रखरखाव और नई परियोजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलेगी।

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 बिहार में पहली बार लागू हुई टोल टैक्स नीति राज्य की सड़क व्यवस्था में बड़ा बदलाव मानी जा रही है। यदि टोल से मिलने वाली राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से सड़क निर्माण, रखरखाव और यातायात सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाता है तो इसका लाभ आम लोगों को मिलेगा। लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि टोल वसूली के साथ लोगों को बेहतर सड़क सुविधा भी सुनिश्चित की जाए। यदि सड़कें खराब रहीं और टोल वसूला गया तो जनता की नाराजगी बढ़ सकती है। इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही इस नई नीति की सफलता की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

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