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Missing Dalit Man Sanoj Kumar: 10 महीने से लापता सनोज कुमार मामले में पटना हाईकोर्ट सख्त, एक्साइज विभाग के 7 आरोपी गिरफ्तार

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Meta Description: भोजपुर के दलित युवक सनोज कुमार के 10 महीने से लापता होने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने जांच पर कड़ी नाराजगी जताई। एक्साइज विभाग के दो एएसआई समेत सात आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन अब तक सनोज का कोई सुराग नहीं मिला। Alam Ki Khabar

भोजपुर/पटना/आलम की खबर:बिहार के भोजपुर जिले से सामने आया 31 वर्षीय दलित युवक सनोज कुमार की गुमशुदगी का मामला अब राज्य की कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब 10 महीने पहले लापता हुए सनोज कुमार का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस बीच पटना हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जांच की रफ्तार और पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत की सख्ती के बाद एक्साइज विभाग के दो एएसआई, तीन होमगार्ड जवान और दो निजी ड्राइवर समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। संबंधित सरकारी कर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है।

परिजनों के अनुसार 13 अगस्त 2025 को सनोज कुमार ने आखिरी बार घर फोन कर बताया था कि बिहिया के पास एक्साइज विभाग के कर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया है। परिवार का दावा है कि फोन पर उन्होंने कहा था, "मुझे फोन मत करो, एक्साइज पुलिस मुझे पीट रही है।" इसके कुछ देर बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और तब से उनका कोई पता नहीं चल सका। परिवार का आरोप है कि हिरासत में मारपीट के बाद उनकी हत्या कर शव को छिपा दिया गया। हालांकि एक्साइज विभाग का दावा है कि हिरासत के दौरान एक युवक वाहन से कूदकर भाग गया था।

सनोज की तलाश में परिवार ने भोजपुर, पटना, बक्सर, छपरा और औरंगाबाद सहित कई जिलों में खोजबीन की। अज्ञात शव मिलने की हर सूचना पर परिजन पहुंचे, लेकिन कहीं भी सनोज का पता नहीं चला। न्याय की मांग को लेकर परिवार ने राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का भी दरवाजा खटखटाया।

मामले में सनोज कुमार के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच की गति और परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसी आरोपियों की मदद कर रही है। कोर्ट ने निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जांच के दौरान सनोज के मोबाइल की आखिरी लोकेशन जगदीशपुर एक्साइज थाना क्षेत्र के आसपास मिली। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि एक्साइज अधिकारियों के बयान लगातार बदलते रहे। पहले हिरासत में लेने से इनकार किया गया, बाद में तीन लोगों को पकड़ने की बात स्वीकार की गई। बाद में यह दावा किया गया कि एक युवक वाहन से कूदकर भाग निकला था। हाईकोर्ट ने उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद इस दावे पर भी सवाल उठाए।

जांच के आधार पर दो एएसआई, तीन होमगार्ड जवान और दो निजी ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। सभी सरकारी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके बावजूद सबसे अहम सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर सनोज कुमार कहां हैं। घटना के 10 महीने बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिलना जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

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संपादकीय: किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी होती है। यदि किसी व्यक्ति के लापता होने को लेकर इतने लंबे समय तक स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता, तो यह जांच व्यवस्था और जवाबदेही दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई ही इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है।

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