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Bharat Tiwari Death Case: भरत तिवारी मामले में मानवाधिकार आयोग का बड़ा आदेश, माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने की सिफारिश

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Alam Ki Khabar: भोजपुर के भरत भूषण तिवारी मौत मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को मृतक के माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने की सिफारिश की है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि मृतक के माता-पिता को उचित एक्स-ग्रेशिया (अंतरिम मुआवजा) उपलब्ध कराया जाए। यह सिफारिश मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18(सी) के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत आयोग जांच लंबित रहने के दौरान पीड़ित पक्ष को अंतरिम राहत देने की अनुशंसा कर सकता है।

भरत तिवारी की मौत के बाद पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। घटना को कथित एनकाउंटर बताते हुए विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। बढ़ते जनदबाव के बीच बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच का निर्णय लिया और पटना हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया।

मानवाधिकार आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान प्रस्तुत पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि भरत भूषण तिवारी की मौत गोली लगने से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक के कारण उनकी मृत्यु हुई। आयोग ने माना कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले का अंतिम निर्णय विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने आयोग से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। आयोग ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सरकार को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अब राज्य सरकार को घटना से जुड़े सभी तथ्यों, अब तक की जांच की प्रगति और उठाए गए प्रशासनिक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम मुआवजा देने की सिफारिश का अर्थ यह नहीं है कि राज्य सरकार ने किसी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। यह केवल पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई अनुशंसा है। अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि भरत तिवारी की मौत के बाद पूरे राज्य में इस घटना को लेकर कई सवाल उठे थे। विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सरकार पर निशाना साधा था, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया था। इसी क्रम में न्यायिक जांच के साथ-साथ मानवाधिकार आयोग भी मामले की अलग से निगरानी कर रहा है।

आयोग ने कहा कि जांच अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर किसी भी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। समय से पहले की गई कोई भी टिप्पणी जांच को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सभी पक्षों को जांच पूरी होने तक संयम बरतना चाहिए।

मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन बिहार सरकार की रिपोर्ट, न्यायिक जांच की प्रगति और अन्य तथ्यों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

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मानवाधिकार आयोग का अंतरिम आदेश पीड़ित परिवार के लिए राहत का संकेत

भरत भूषण तिवारी मौत मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग का अंतरिम आदेश यह दर्शाता है कि जांच पूरी होने तक भी पीड़ित परिवार को राहत देने की व्यवस्था कानून में मौजूद है। हालांकि यह मुआवजा किसी पक्ष की दोषसिद्धि या कानूनी जिम्मेदारी का प्रमाण नहीं माना जाएगा। अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू निष्पक्ष न्यायिक जांच है, जिससे घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच ही जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम होती है।

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