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Bihar State Highway Toll Policy: बिहार सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, निजी कार, बाइक और जीप पर नहीं लगेगा टोल, सिर्फ कॉमर्शियल वाहनों से होगी यूजर फीस

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने स्टेट हाईवे टोल को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। निजी कार, बाइक, जीप और अन्य व्यक्तिगत वाहनों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा। नई यूजर फीस व्यवस्था केवल कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी। जानिए सरकार ने क्या कहा।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर:बिहार सरकार ने स्टेट हाईवे टोल टैक्स को लेकर फैली सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि अब राज्य के स्टेट हाईवे और कुछ पुलों पर चलने वाले निजी वाहन चालकों को भी टोल टैक्स देना पड़ेगा। इस खबर के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस शुरू हो गई थी। बढ़ते भ्रम के बीच सरकार ने महज एक दिन के भीतर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर साफ कर दिया कि निजी उपयोग में आने वाली कार, जीप, बाइक, स्कूटर और अन्य व्यक्तिगत वाहनों से किसी भी प्रकार की यूजर फीस नहीं ली जाएगी। नई व्यवस्था केवल व्यावसायिक यानी कॉमर्शियल वाहनों पर लागू होगी। सरकार के इस ऐलान के बाद लाखों निजी वाहन मालिकों ने राहत की सांस ली है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की जेब पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। केवल वे वाहन जो व्यवसायिक गतिविधियों के लिए सड़क का उपयोग करते हैं, उनसे ही यूजर फीस वसूली जाएगी। इनमें ट्रक, बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी कॉमर्शियल वाहन शामिल होंगे। सरकार का कहना है कि ऐसे वाहन सड़कों का सबसे अधिक उपयोग करते हैं और सड़क रखरखाव पर सबसे ज्यादा दबाव भी इन्हीं के कारण पड़ता है। इसी वजह से सड़कों के रखरखाव, पुलों की मरम्मत और नई सड़क परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे बिहार के सभी स्टेट हाईवे पर एक साथ टोल वसूली शुरू नहीं होगी। पहले संबंधित सड़कों का ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा। सड़क की गुणवत्ता, वाहन संख्या, निर्माण लागत और तकनीकी मानकों का आकलन करने के बाद अधिसूचना जारी होगी। उसी अधिसूचना में उन स्टेट हाईवे और पुलों की सूची जारी की जाएगी जहां व्यावसायिक वाहनों से यूजर फीस वसूली जाएगी। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में बिहार में बड़ी संख्या में नई सड़कें, बाइपास और पुल बने हैं। इनके नियमित रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है। व्यावसायिक वाहनों से मिलने वाली यूजर फीस का उपयोग सड़क नेटवर्क को मजबूत करने, पुलों की मरम्मत, नई परियोजनाओं और बेहतर यातायात सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

नई व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी वहां इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम और फास्टैग आधारित भुगतान व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि टोल संग्रह पारदर्शी और तेज हो सके। सरकार का कहना है कि इससे वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित की जाएगी।

कैबिनेट के फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर भी निजी वाहनों पर टोल लगाए जाने की खबर तेजी से वायरल हुई थी। लेकिन सरकार के ताजा स्पष्टीकरण के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। निजी वाहन पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त टोल के स्टेट हाईवे पर चल सकेंगे, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के लिए यूजर फीस की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

संपादकीय: भ्रम दूर हुआ, अब पारदर्शिता सबसे बड़ी जिम्मेदारी

यह फैसला आम लोगों के लिए राहत भरा है क्योंकि सरकार ने निजी वाहनों को टोल व्यवस्था से बाहर रखने का स्पष्ट संदेश दिया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि अधिसूचना जारी होने से पहले सभी नियमों, दरों और लागू होने वाले मार्गों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न फैले।

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