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Bihar News: पीएमसीएच के पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को 13 जुलाई को पेश होने का निर्देश, स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच समिति

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Alam Ki Khabar: बिहार स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को 13 जुलाई को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर: बिहार स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह से जुड़े चर्चित प्रकरण में जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उन्हें 13 जुलाई 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। विभाग ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति के समक्ष डॉ. सिंह को अपराह्न 3 बजे उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला 23 जून 2026 की उस घटना से जुड़ा है, जब पीएमसीएच में आयोजित एक महत्वपूर्ण विभागीय कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह संस्थान में मौजूद नहीं थे। विभाग का आरोप है कि उन्होंने न तो अवकाश की पूर्व सूचना दी और न ही किसी अन्य अधिकारी को प्रभार सौंपा। कार्यक्रम के दौरान कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून को उन्हें प्रभारी प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर स्थानांतरित कर दिया था। अब गठित जांच समिति में अपर सचिव मृणायक दास तथा निदेशक प्रमुख (प्रशासन) डॉ. प्रणय राज शरण सिन्हा को भी सदस्य बनाया गया है। समिति डॉ. सिंह का पक्ष सुनने के साथ विभागीय दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। दूसरी ओर डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रख चुके हैं। उनका कहना है कि घटना वाले दिन वे दुर्घटना में गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिसके कारण विभागीय अधिकारियों के फोन नहीं उठा सके। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने स्वयं अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया था। सरकारी वाहन निजी क्लिनिक के बाहर खड़ा रहने के आरोपों पर भी उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका पैतृक आवास उनके क्लिनिक के पास ही है, इसलिए वाहन वहीं खड़ा किया जाता था। उनका यह भी आरोप है कि विभाग ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए और बिना उनका पक्ष सुने कार्रवाई कर दी। अब 13 जुलाई को होने वाली सुनवाई को इस पूरे मामले का अहम मोड़ माना जा रहा है। माना जा रहा है कि डॉ. सिंह अपने चिकित्सा दस्तावेज, दुर्घटना से जुड़े प्रमाण और अन्य साक्ष्य समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी और उसी आधार पर अंतिम प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा।

निष्पक्ष जांच से ही बढ़ेगा भरोसा

किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी अधिकारी पर आरोप हैं तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच समिति गठित कर सुनवाई का मौका देना पारदर्शी प्रक्रिया की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा सकता है। अब सभी की नजर समिति की निष्पक्ष जांच और अंतिम रिपोर्ट पर रहेगी।

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