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समस्तीपुर की बेटी मनीषा ने रचा नया इतिहास मधुबनी पेंटिंग से विदेशों में चमका रही समस्तीपुर का नाम

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अमरदीप नारायण प्रसाद समस्तीपुर

समस्तीपुर। कला जब जुनून से मिले तो पहचान सीमाओं में नहीं बँधती—इसी बात को सच कर दिखाया है बहादुरपुर, समस्तीपुर की मनीषा ने। मधुबनी पेंटिंग की अद्भुत दुनिया में मनीषा आज वह नाम बन चुकी हैं, जिस पर न सिर्फ उनका जिला, बल्कि पूरा देश गर्व कर रहा है। चेक रिपब्लिक तक भारतीय संस्कृति और बिहार की पारंपरिक कला को पहुँचाने वाली मनीषा कला जगत में नई मिसाल बनकर उभरी हैं।

मनीषा का बचपन समस्तीपुर में बीता। उनकी मां स्वर्गीय स्नेहलता वर्मा समस्तीपुर गर्ल्स स्कूल में शिक्षिका थीं, जबकि पिता डॉ. मनी मोहन प्रसाद सदर अस्पताल, समस्तीपुर में सेवा दे चुके हैं। पति हेमंत राज सिन्हा चेक रिपब्लिक स्थित भारतीय दूतावास में कार्यरत हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि शिक्षा और सेवा से जुड़ी होने के बावजूद मनीषा ने कला को चुना और इसे अपनी पहचान बना लिया।

यूट्यूब को बनाया गुरु, बन गई अंतरराष्ट्रीय कलाकार

कहते हैं सीखने की कोई उम्र और सीमा नहीं होती। मनीषा ने इस कहावत को चरितार्थ करते हुए मधुबनी पेंटिंग की शुरुआत यूट्यूब वीडियो देखकर की। किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना, सिर्फ अपनी लगन और नियमित अभ्यास के बल पर उन्होंने इस कला को नई ऊँचाई दी।

पिछले सात वर्षों में मनीषा ने धीरे-धीरे मधुबनी पेंटिंग की बारीकियों को सीखा और मात्र तीन वर्षों के भीतर ऐसी महारत हासिल कर ली कि उनके हाथों से बनी कलाकृतियाँ आज चेक रिपब्लिक में बेहद लोकप्रिय हैं। भारतीय दूतावास से लेकर स्थानीय आर्ट गैलरी तक, कई मंचों पर उनकी कला की सराहना हो रही है।

विदेशों में बढ़ी मधुबनी कला की मांग

चेक रिपब्लिक में भारतीय कला के प्रति उत्साह बढ़ रहा है और मनीषा के कारण मधुबनी पेंटिंग की विशेष मांग भी। उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स न केवल बिक रही हैं बल्कि प्रदर्शनी में भी अलग पहचान बना रही हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि देश की पारंपरिक कला वैश्विक मंचों पर भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

समाज के लिए प्रेरणा, बेटियों का बढ़ा मान

मनीषा की सफलता उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपनी मेहनत और जज्बे से कुछ कर दिखाना चाहती हैं। समस्तीपुर की यह बेटी साबित कर चुकी है कि अवसर सीमित हों तब भी इच्छा और परिश्रम से इतिहास लिखा जा सकता है।

उन्होंने यह भी दिखा दिया कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपने माता-पिता, परिवार और समाज का नाम रोशन कर रही हैं, कई बार बेटों से भी आगे निकलकर।उनकी कहानी संदेश देती है।हुनर और हिम्मत हो तो दुनिया की कोई मंज़िल असंभव नहीं।”

मधुबनी पेंटिंग के माध्यम से चेक रिपब्लिक में भारतीय कला का परचम लहराने वाली मनीषा आज समस्तीपुर ही नहीं, पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय हैं। उनकी कला यात्रा आगे किन ऊँचाइयों को छुएगी, यह देखना निश्चित रूप से प्रेरणादायक होगा।

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