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नशा-मुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगांठ पर शपथ तो हुई, पर हकीकत के आईने में बड़ा सवाल — क्या सिर्फ औपचारिकताओं से बदल पाएगा समस्तीपुर?

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        मोहम्मद आलम प्रधान सपादक
              (alamkikhabar.com)
समस्तीपुर:नशा-मुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगांठ पर मंगलवार को समाहरणालय सभागार में प्रशासन की ओर से सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और उपस्थित आम नागरिकों ने नशे के खिलाफ शपथ ली और नशे के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा भी हुई। जिला पदाधिकारी ने युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।

सभागार से लेकर विद्यालयों, कॉलेजों, जीविका समूहों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक—पूरा जिला आज ‘नशा-मुक्ति’ के संकल्प से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अभियान में भाग लिया और नशे के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

लेकिन असल सवाल यही से शुरू होता है…

संपादकीय दृष्टि से देखें तो यह पूरा कार्यक्रम एक बार फिर उसी पुरानी बीमारी में जकड़ा हुआ दिखा—
फॉर्मेलिटी निभाकर खत्म कर देना।

वरिष्ठ अधिकारी हों या निचले स्तर के कर्मचारी—सबने रस्म-अदायगी में हिस्सा लिया, मगर जमीनी हकीकत आज भी वहीं की वहीं है।

जमीनी स्थिति—‘नशा-मुक्त भारत’ पोस्टरों में, वास्तविकता में ‘नशा-पूर्ति बिहार’

सच्चाई यह है कि शहर से लेकर गाँव की गलियों तक नशे का सामान खुलेआम बिक रहा है।पान दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक पान मसाला,राजनिगंधा,खैनी,तंबाकू,
गूटखा,सबकुछ बेधड़क बिक रहा है।
नाम मात्र का प्रतिबंध है, पालन कहीं नहीं।कम उम्र के बच्चे तक गांजा, स्नेक, भांग जैसे नशे के शिकार हो रहे हैं।अधिक चिंताजनक बात यह कि नाबालिग बच्चों और महिलाओं तक को होम-डिलीवरी शराब सप्लाई चेन में शामिल किया जा रहा है—और प्रशासन चुप है, बिल्कुल चुप।

नशा-मुक्ति अभियान तभी सफल होगा जब…

अगर प्रशासन सच में बदलाव चाहता है, तो सिर्फ सभागार में शपथ दिलाने से कुछ नहीं होगा।
सड़क पर उतरकर कड़ाई दिखानी होगी।कार्रवाई वास्तविक होनी चाहिए, दिखावटी नहीं।
बाजार की हर दुकान पर निगरानी हो,गली-कूचे में चल रही अवैध सप्लाई टूटे,नाबालिगों की संलिप्तता पर तत्काल रोक लगे,और नशा माफिया की जड़ों पर प्रहार किया जाए।तभी नशा-मुक्ति अभियान कागजों से निकलकर जमीन पर उतर सकेगा।
आखिर में—संकल्प तो सबने लिया, पर क्या इस बार नतीजा बदलेगा?

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे नशे से दूर रहेंगे और समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश फैलाएंगे।
लेकिन असली संकल्प प्रशासन को लेना होगा—सख्ती का, कार्रवाई का, और नशे के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का।वरना शपथ हर साल ली जाएगी, और नशा हर साल बढ़ता जाएगा।

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