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PHED Water Supply Issue:रोसड़ा में जल संकट: चकथातपुरब पंचायत के वार्ड-8 में छह महीने बाद भी अधूरी जलापूर्ति योजना, ग्रामीणों में आक्रोश

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Alam Ki Khabar: चकथातपुरब वार्ड नंबर-8 में पीएचईडी की जलापूर्ति योजना छह महीने बाद भी अधूरी है। ग्रामीणों ने 20 सूत्री बैठक में भी मामला उठाया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

समस्तीपुर, 12 जुलाई। आलम की खबर: समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत चकथातपुरब पंचायत के वार्ड नंबर-8 में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचईडी विभाग की ओर से करीब छह महीने पहले खैरा स्थित 08 मब्बी चौक के निकट बोरिंग कराया गया था, लेकिन अब तक पानी टंकी (स्ट्रक्चर) का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इसके कारण लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार वार्ड में नई पाइपलाइन बिछाने का काम भी पूरा नहीं हुआ है। पुराने पाइप कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार विभाग के जेई को जानकारी दी गई, लेकिन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी बिना जमीनी स्तर पर काम किए शिकायत को पूर्ण दिखा दिया जाता है।

वार्ड-8 के ग्रामीणों ने बताया कि जल समस्या को लेकर 20 सूत्री समिति की बैठक में भी मामला उठाया गया था। 20 सूत्री सदस्य मोहम्मद नजमुल हुदा ने बैठक में ग्रामीणों की परेशानी को प्रमुखता से रखा था। बैठक में जेई द्वारा आश्वासन दिया गया था कि एक सप्ताह के अंदर वार्ड में पानी टंकी का काम शुरू करा दिया जाएगा, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बैठक में मामला उठाने और अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है। लोगों ने विभागीय लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए जल्द से जल्द जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की ओर से हर घर तक पानी पहुंचाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप कर अधूरी योजना को पूरा कराने की मांग की है।

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• ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को लेकर बढ़ती शिकायतें

• सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पर उठे सवाल

• वार्ड स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की मांग तेज

योजना बनी, लेकिन पानी का इंतजार जारी

ग्रामीण विकास की सबसे जरूरी जरूरतों में पेयजल व्यवस्था शामिल है। सरकार योजनाएं बनाती है, बजट जारी करती है, लेकिन जमीन पर उसका लाभ तभी पहुंचता है जब जिम्मेदार अधिकारी नियमित निगरानी करें।

चकथातपुरब वार्ड-8 का मामला यही सवाल खड़ा करता है कि अगर छह महीने बाद भी जलापूर्ति योजना अधूरी है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है तो जिम्मेदारी किसकी है। 20 सूत्री बैठक में मामला उठने के बाद भी समाधान नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर सुविधा की जरूरत है।

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