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Bihar Panchayat Election: इस साल नहीं होंगे पंचायत चुनाव, 36 साल बाद होगा नया परिसीमन

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Alam Ki Khabar: बिहार में प्रस्तावित पंचायत चुनाव एक साल टलने की संभावना है। सरकार पहले 36 साल बाद पंचायतों का परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया पूरी करेगी। जानिए पूरा अपडेट।

पटना, 17 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने चुनावी प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाने के बजाय पहले पंचायतों के नए परिसीमन और आरक्षण से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लिया है। इसी वजह से इस वर्ष संभावित पंचायत चुनाव अब अगले वर्ष जुलाई-अगस्त 2027 में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि पंचायतों की नई सीमाएं तय किए बिना चुनाव कराना उचित नहीं होगा। यही कारण है कि करीब 36 वर्षों बाद पूरे राज्य में पंचायतों का व्यापक परिसीमन कराया जाएगा। यह कार्य 2011 की जनगणना के आधार पर होगा ताकि आबादी के अनुरूप वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का संतुलित निर्धारण किया जा सके। वर्तमान व्यवस्था में कई पंचायतों में आबादी का असंतुलन है, जिसे नई प्रक्रिया के जरिए दूर करने की तैयारी है। पंचायती राज विभाग के अनुसार परिसीमन का कार्य अगस्त 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2027 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। इस दौरान प्रारूप प्रकाशित होगा, आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे तथा अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। परिसीमन पूरा होने के बाद सरकार पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर डेडिकेटेड कमीशन का गठन करेगी। आयोग अपनी रिपोर्ट देने के बाद ही आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होगा और इसके बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि यह पूरा कदम संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उठाया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद न हो। चुनाव टलने की स्थिति में मौजूदा मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य अपने दायित्व निभाते रहेंगे, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायत स्तर के प्रशासनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराना है। नए परिसीमन से पंचायतों में प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा और आबादी के अनुरूप क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। इस निर्णय का असर हजारों संभावित उम्मीदवारों की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ेगा, जिन्हें अब करीब एक वर्ष और इंतजार करना होगा। वहीं राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। ग्रामीण राजनीति के लिहाज से आने वाला वर्ष काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिसीमन और आरक्षण की नई व्यवस्था के बाद कई पंचायतों का चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है।

बदलेगा पंचायत चुनाव का पूरा समीकरण

करीब 36 वर्षों बाद होने वाला पंचायत परिसीमन केवल सीमाओं का बदलाव नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण प्रतिनिधित्व की नई तस्वीर भी तय करेगा। आबादी के अनुसार वार्डों का पुनर्गठन, आरक्षण की नई व्यवस्था और बदली हुई पंचायत सीमाएं आने वाले चुनाव को पहले से अलग बना सकती हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव 2027 केवल जनप्रतिनिधियों के चयन का नहीं, बल्कि नई प्रशासनिक संरचना के गठन का भी चुनाव होगा।

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