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नई नीतीश कैबिनेट में सामाजिक संतुलन का दम, हर जातीय समूह को मिली जगह, NDA ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश

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बिहार में एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसा मंत्रिमंडल पेश किया है, जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे में नई चर्चा शुरू कर दी है। नई कैबिनेट की सूची साफ दिखाती है कि सरकार ने सत्ता के साथ सामाजिक संतुलन और जातीय प्रतिनिधित्व को बराबर महत्व दिया है। लगभग हर बड़े जातीय वर्ग को इसमें स्थान दिया गया है — चाहे वह सवर्ण हों, ओबीसी-ईबीसी, दलित हों या मुस्लिम समुदाय।

सरकार के बेहद करीबी सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों के चयन में “सामाजिक प्रतिनिधित्व + राजनीतिक संदेश + प्रशासनिक क्षमता”— इन तीनों को समान प्राथमिकता दी गई है। यह कैबिनेट किसी एक समूह को नहीं, बल्कि पूरे बिहार को साथ लेकर चलने की रणनीति को दर्शाती है।

ऊपरी जातियों का संतुलित प्रतिनिधित्व

नई कैबिनेट में सवर्ण समाज के कई समीकरणों को साधा गया है।
सूची इस प्रकार है:

राजपूत समुदाय

लेसी सिंह

श्रेयसी सिंह

संजय सिंह टाइगर

संजय कुमार सिंह


भूमिहार समुदाय

विजय कुमार सिन्हा

विजय कुमार चौधरी


ब्राह्मण

मंगल पांडेय


कायस्थ

नितिन नवीन


ऊपरी जातियों की इन नियुक्तियों से एनडीए ने अपने पारंपरिक जनाधार को मजबूत करने का संकेत दिया है।

OBC और EBC को व्यापक स्थान नीतीश मॉडल की झलक

नीतीश सरकार में पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को फिर से खास तरजीह दी गई है।

कुशवाहा समुदाय

सम्राट चौधरी

सुनील कुमार

दीपक प्रकाश


यादव समुदाय

रामकृपाल यादव

बिजेंद्र प्रसाद यादव


EBC (अति पिछड़ा वर्ग)

मदन सहनी

अरुण शंकर प्रसाद

सुरेंद्र मेहता

नारायण प्रसाद

रमा निषाद


इन नियुक्तियों से साफ है कि एनडीए ने 2025 के चुनाव बाद भी EBC-OBC वर्ग को अपने साथ जोड़े रखने की रणनीति पर काम किया है।

कैबिनेट में दलित समाज की मजबूत मौजूदगी

नई टीम में दलित समुदाय से चार चेहरे शामिल किए गए हैं—

अशोक चौधरी

संतोष कुमार सुमन

लखेंद्र कुमार रोशन

संजय कुमार


इतना प्रतिनिधित्व एनडीए द्वारा सामाजिक न्याय की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुस्लिम व अन्य वर्गों का प्रतिनिधित्व

मुस्लिम समुदाय से मो. जमा खान को मंत्री बनाया गया है।

‘कहार’ जाति से डॉ. प्रमोद कुमार की एंट्री ने सामाजिक बहुलता को और मजबूत किया है।


कैबिनेट में छिपे राजनीतिक संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मंत्रिमंडल सिर्फ प्रशासनिक टीम नहीं, बल्कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों का रोड-मैप भी है।

हर जातीय समूह को प्रतिनिधित्व

दो डिप्टी सीएम

नए चेहरों को मौका

पुराने अनुभव का संतुलन


इन सबने साफ संदेश दे दिया है कि नीतीश-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अगले 5 सालों में विकास + सामाजिक न्याय + राजनीतिक संतुलन को अपने शासन का केंद्र बनाने वाली है।

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