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फोन पर गायब, कुर्सी पर हाज़िर! सिंघिया के कार्यपालक पदाधिकारी की जवाबदेही पर बड़ा सवाल”

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            जीएम, कुमार सिंह सिंधिया                             संवाददाता

जनता तो दूर—पत्रकारों तक का फोन नहीं उठता, आखिर जवाबदेही किससे?

समस्तीपुर जिला प्रशासन का दावा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही उनकी प्राथमिकता है, लेकिन सिंघिया नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने मानो खुद को इस जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया है। हालात यह हैं कि पदाधिकारी महोदय का फोन बजता तो है, लेकिन उठता कभी नहीं—चाहे सामने आम जनता हो या पत्रकार।ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन्होंने “फोन नहीं उठाने की कसम” खा ली हो।सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता से दूरी बनाना, और सवाल पूछने पर मौन साधना—क्या यही good governance का नया मॉडल है?

जनता परेशान—पत्रकार मायूस—और सिस्टम खामोश!

सफाई, पेयजल, नाली, रोशनी, टैक्स और अन्य स्थानीय समस्याएँ हर रोज़ लोगों को परेशान कर रही हैं।
लेकिन नगर पंचायत का मुखिया ही फोन पर गायब मोड में है।

पत्रकार जब सवाल पूछना चाहते हैं —
“साहब, काम क्यों रुका?”
“फंड कहां खर्च हुआ?”
“लोगों की शिकायतें कब सुनी जाएंगी?”

लेकिन उधर से मिलता है सिर्फ रिंगटोन, जवाब नहीं।

क्या सिंघिया नगर पंचायत ‘ऑटोपायलट मोड’ पर चल रहा है?

जब पदाधिकारी फोन न उठाए, जनता की शिकायत न सुने, और मीडिया के सवालों से भागे —
तो सवाल उठता है:

 .कौन देख रहा है नगर पंचायत का काम?
. अधिकारी जवाबदेही से भागेंगे तो विकास कैसे होगा?
. क्या जिला प्रशासन ऐसे अफसरों पर कार्रवाई करेगा?

अब कार्रवाई का वक्त

सिंघिया के लोग पूछ रहे हैं—
“जब अधिकारी ही जनता से किनारा कर ले, तो शिकायत किससे की जाए?”

जिला प्रशासन को चाहिए कि ऐसे पदाधिकारियों पर तत्काल संज्ञान लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करे। सरकारी पद किसी की निजी जागीर नहीं होती—यह जनता की सेवा का दायित्व है।

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